Kathmandu काठमांडू। भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर केंद्रीय विद्यालय, काठमांडू के छात्रों, शिक्षकों और दूतावास के अधिकारियों ने मिलकर ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन किया। पूरे परिसर में राष्ट्रभक्ति की भावना और भारतीय संस्कृति की गूंज सुनाई दी। कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय दूतावास के उप प्रमुख (Deputy Chief of Mission) की उपस्थिति में दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद छात्रों ने उत्साहपूर्वक राष्ट्रगीत का गायन किया, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक महत्व और इसके भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान पर भी प्रकाश डाला।
दूतावास के अधिकारियों ने कहा कि 'वंदे मातरम' सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत की एकता, त्याग और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने पर यह आयोजन न केवल भारत के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि भारत-नेपाल के सांस्कृतिक संबंधों को भी और मजबूत बनाता है। केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रति गर्व का भाव मिलता है। छात्रों ने राष्ट्रगीत के गायन के साथ-साथ ‘वंदे मातरम’ के लेखक बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को भी श्रद्धांजलि दी।
इस मौके पर भारतीय दूतावास परिसर को राष्ट्रीय ध्वजों और फूलों से सजाया गया था। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एक स्वर में भारत माता की जय के नारे लगाए। ‘वंदे मातरम’, जिसे पहली बार 1875 में लिखा गया था, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति का प्रमुख प्रतीक बना। इसके 150 वर्ष पूरे होने पर भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक एकता और ऐतिहासिक विरासत को साझा करने का यह अवसर विशेष महत्व रखता है।