Puri पुरी। ओडिशा के पुरी में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने ‘सनातन ध्वजा’ का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने ध्वजा के धार्मिक महत्व और उस पर अंकित प्रतीकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने इसे धर्म की ध्वजा बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सभी के कल्याण और मंगल की भावना को प्रकट करना है।
स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने कहा, “यह धर्म की ध्वजा है। यह ध्वजा सभी के कल्याण और मंगल के लिए है।” उन्होंने बताया कि वैदिक परंपरा के अनुसार ध्वजा पर सूर्य का चित्र होना चाहिए। इसी परंपरा को ध्यान में रखते हुए ध्वजा पर सूर्य को स्थान दिया गया है।
उन्होंने आगे बताया कि ध्वजा के मध्य में स्वस्तिक का चिह्न भी शामिल किया गया है। उनके अनुसार सूर्य और स्वस्तिक के प्रतीक वाली भगवा ध्वजा को फहराया जाएगा। उन्होंने इन प्रतीकों को सनातन और वैदिक परंपरा से जोड़ते हुए इनके धार्मिक महत्व पर जोर दिया।
शंकराचार्य ने कहा, “वैदिक परंपरा के अनुसार इस पर सूर्य का चित्र होना आवश्यक है और बीच में हमने स्वस्तिक को शामिल किया है। हम सूर्य और स्वस्तिक के चिह्न वाली भगवा ध्वजा को फहराएंगे। सनातन ध्वजा के अनावरण के दौरान उन्होंने हिंदू राष्ट्र को लेकर भी अपना विचार रखा। उन्होंने कहा, “हम हिंदू राष्ट्र की स्थापना करेंगे।” उनका यह बयान धार्मिक और सामाजिक विषयों पर उनके दृष्टिकोण के रूप में सामने आया है।
पुरी में हुए इस कार्यक्रम में सनातन ध्वजा और उसके स्वरूप को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया। शंकराचार्य ने ध्वजा को केवल एक प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि धर्म और सभी के कल्याण की भावना से जुड़ा बताया। उन्होंने सूर्य, स्वस्तिक और भगवा रंग को ध्वजा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि इसे वैदिक परंपरा के अनुरूप तैयार किया गया है। इस दौरान उन्होंने सनातन परंपरा और धर्म के संदेश को आगे बढ़ाने की बात भी कही।