केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व की कांग्रेस सरकारों पर करारा हमला बोला, देखे वीडियो
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को पूर्व की कांग्रेस सरकारों पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आजादी के तुरंत बाद पंडित मदनमोहन मालवीय जी को भारत रत्न मिल जाना चाहिए था लेकिन बड़े दुख की बात है कि ऐसा नहीं हुआ। साल 2014 में उन्हें भारत रत्न दिया गया। शाह ने पंडित मदनमोहन मालवीय को याद करते हुए कहा कि महामना ने कई संगठनों में काम किया... आज आप सोच भी नहीं सकते कि कोई एक ही समय में कांग्रेस और हिंदू महासभा का मुखिया हो सकता है।
शाह ने कहा कि आजादी के तुरंत बाद मालवीय जी को भारत रत्न मिल जाना चाहिए था लेकिन बड़े दुख की बात है कि ऐसा नहीं हुआ। जब 2014 में मालवीय जी को भारत रत्न मिला तब काफी लोगों ने कहा कि भारत रत्न की जरूरत नहीं थी, 'महामना' ही उनके लिए बहुत बड़ी उपाधि थी जो स्वयं रवीन्द्रनाथ ठाकुर और महात्मा गांधी जी ने दी थी।
शाह ने कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय जी व्यक्ति नहीं वरन एक संस्थान थे। आजादी की लड़ाई उन्होंने सिर्फ राजनेता के तौर पर नहीं लड़ी बल्कि एक पत्रकार के तौर पर और वकालत के जरिए भी लड़ी। मात्रभाषा, भारतीय संस्कृति और भारतीयता का एक साथ उद्घोष करने वाले एक मात्र स्वतंत्रता सेनाना पंडित मदन मोहन मालवीय जी थे।
अमित शाह ने कहा कि स्वधर्म, स्वभाषा, भारतीय संस्कृति और स्वराज इन चारों चीजों को शिक्षा के साथ बुनना और आधुनिक शिक्षा से युक्त युवाओं को देश के पुननिर्माण में लगाना इस उद्देश्य को उस जमाने में मालवीय जी ने जमीन पर उतारा।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत के मुताबिक लोग अपने वोट को सुरक्षित करने के लिए खुद ही जागरूक हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि पं. मालवीय एक सफलतम वकील के साथ साथ भारतीय परंपरा के पोषक और चिंतक भी थे। उनके मृदुभाषी व्यक्तित्व की इससे बड़ी मिसाल और क्या होगी कि उन्होंने एक साथ कई संस्थाओं और संगठनों में काम किया... यहां तक कि वैचारिक मतभेद रखने वाली संस्थाओं में भी लंबे समय तक काम किया। मौजूदा वक्त में आप सोच भी नहीं सकते कि कोई व्यक्ति एक ही समय में कांग्रेस और हिंदू महासभा का मुखिया हो सकता है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय जी हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत इन तीनों भाषाओं के ज्ञाता थे, इन तीनों भाषाओं में धाराप्रवाह भाषण दे सकते थे। उन्होंने 'मकरन्द' उपनाम से कविताएं भी लिखी थी, जो खूब छपी थी। मालवीय जी की कथनी और करनी में कभी भी अंतर नहीं रहा। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का सवाल है तो मैं अभी भी मानता हूं कि मालवीय जी के जीवन की सभी उपलब्धियों में सबसे बड़ी कोई उपलब्धि है तो वो काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना है।