नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों में कथित 'बड़ी साजिश' से जुड़े यूएपीए मामले में स्टूडेंट एक्टिविस्ट उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि गवाहों की जांच पूरी होने या अब से एक वर्ष के भीतर, वे जमानत के लिए फिर से निचली अदालत में जा सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि दोनों के मामले पर इस आदेश का कोई प्रभाव डाले बिना विचार किया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अन्य पांच आरोपियों के निरंतर कारावास को आवश्यक नहीं माना और उनकी जमानत मंजूर की.
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक व्यक्ति के मामले का फैसला उनकी कथित भूमिकाओं के आधार पर अलग-अलग किया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी अपीलकर्ताओं को दोषसिद्धि के मामले में समान दर्जा नहीं दिया जा सकता. कुछ आरोपियों का आचरण सहायक प्रकृति का प्रतीत होता है. सभी आरोपियों की भूमिका निर्धारित की जानी चाहिए. सभी के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा सकता. अदालत को आपराधिक दायित्व निर्धारण और जमानत संबंधी मामलों के बीच भ्रम पैदा करने से बचना चाहिए. सभी आरोपियों के साथ समान व्यवहार करने से मुकदमे से पहले हिरासत में रखने को बढ़ावा मिलेगा. हमें यह जांच करनी होगी कि क्या निरंतर हिरासत से कोई लाभ होता है. हमें दोष सिद्ध करने में सावधानी बरतनी होगी.