गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मोदीनगर के भोजपुर स्थित गांव शकूरपुर और मुरादनगर के गांव जलालाबाद निवासी दो कांवड़ियों की हरिद्वार के बहादराबाद में निर्माणाधीन फ्लाईओवर का गार्डर गिरने से मौत हो गई। हादसे की जानकारी मिलते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया और दोनों गांवों में शोक की लहर फैल गई। सूचना मिलने के बाद परिजन और ग्रामीण घटनास्थल के लिए रवाना हो गए।
भोजपुर के गांव शकूरपुर निवासी मटरू कश्यप का 22 वर्षीय बेटा कृष्ण कश्यप आईटीआई करने के बाद एक बिजली वर्कशॉप में इंटर्नशिप कर रहा था। परिजनों के अनुसार, कृष्ण की मुरादनगर के गांव जलालाबाद निवासी 21 वर्षीय तनुज से गहरी दोस्ती थी। कृष्ण 28 जुलाई को अपने दोस्त तनुज और गांव शकूरपुर निवासी अमन व चमन के अलावा पड़ोसी गांव बखरवा निवासी प्रशांत सहित अन्य साथियों के साथ कांवड़ लेने हरिद्वार गया था।
परिजनों ने बताया कि शिवभक्तों का दल ढोल की थाप के साथ कांवड़ यात्रा के लिए रवाना हुआ था। हरिद्वार पहुंचने के बाद सभी ने शनिवार सुबह हर की पौड़ी से कांवड़ उठाई। इसके बाद शनिवार दोपहर करीब दो बजे सभी कांवड़िये हरिद्वार से बाहर बहादराबाद स्थित गांव बड़ेडी राजपूतान में निर्माणाधीन फ्लाईओवर के नीचे आराम करने लगे। इसी दौरान फ्लाईओवर का भारी लोहे का गार्डर अचानक कांवड़ियों के ऊपर गिर गया।
हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। गार्डर की चपेट में आने से कृष्ण कश्यप और तनुज कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। गांव शकूरपुर निवासी कृष्ण और गांव जलालाबाद निवासी तनुज काफी अच्छे दोस्त थे। बताया गया कि दोनों पिछले करीब पांच साल से साथ में कांवड़ लेकर जा रहे थे।
कृष्ण के पिता मटरू ने बताया कि बेटे का रिश्ता तय हो चुका था और जनवरी में उसकी शादी होनी थी। लेकिन हादसे ने शादी से पहले ही परिवार की खुशियां छीन लीं। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, जलालाबाद निवासी तनुज ने इंटरमीडिएट के बाद अग्निवीर और अन्य सैन्य बलों में जाने की तैयारी शुरू की थी। तनुज की मौत की खबर मिलते ही गांव में शोक छा गया। तनुज के पिता महेश, मां सीमा और छोटे भाई सागर का रो-रोकर बुरा हाल है। कृष्ण और तनुज की दोस्ती काफी पुरानी थी। तनुज की ननिहाल शकूरपुर के पास स्थित गांव बखरवा में थी और उसका वहां काफी आना-जाना था। इसी के चलते कृष्ण और तनुज की दोस्ती शुरू हुई थी।