रिश्वत लेते पकड़े गए दो कर्मचारी, लोगों ने विजिलेंस टीम को बनाया बंधक

गेट पर लगा दिया था ताला

Update: 2026-07-30 08:52 GMT
Udham Singh Nagar. उधमसिंह नगर। उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले की सितारगंज तहसील में रिश्वतखोरी के खिलाफ विजिलेंस की कार्रवाई के बाद अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई। भ्रष्टाचार के एक मामले में दो कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार करने पहुंची विजिलेंस टीम को तहसील कर्मचारियों के विरोध का सामना करना पड़ा। कर्मचारियों ने विरोध स्वरूप तहसील परिसर के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया, जिसके कारण विजिलेंस की टीम और गिरफ्तार किए गए दोनों कर्मचारी करीब 20 घंटे से अधिक समय तक तहसील भवन के अंदर ही फंसे रहे। इस घटनाक्रम ने पूरे जिले में प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी और भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई को लेकर नई बहस छेड़ दी।

जानकारी के अनुसार, विजिलेंस विभाग को पिछले कुछ समय से सितारगंज तहसील में रिश्वतखोरी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि तहसील में विभिन्न राजस्व और प्रशासनिक कार्यों के लिए लोगों से अवैध रूप से पैसे वसूले जा रहे हैं। इन शिकायतों की प्राथमिक जांच के बाद विजिलेंस ने मामले में सबूत जुटाने शुरू किए। जब पर्याप्त साक्ष्य एकत्र हो गए, तब विभाग ने ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। बुधवार दोपहर विजिलेंस की टीम पूरी तैयारी के साथ सितारगंज तहसील पहुंची। कार्रवाई तहसील भवन की दूसरी मंजिल पर स्थित संग्रह कक्ष में की गई। विजिलेंस अधिकारियों ने संग्रह अमीन मदन शर्मा और तहसील के बड़े बाबू (वरिष्ठ सहायक) उपेंद्र राणा को कथित रूप से रिश्वत की राशि लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। अधिकारियों के अनुसार पूरी कार्रवाई नियमानुसार की गई और रिश्वत लेने के पर्याप्त प्रमाण मिलने के बाद ही दोनों कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया।

जैसे ही विजिलेंस टीम ने दोनों कर्मचारियों को हिरासत में लिया, तहसील परिसर में मौजूद अन्य कर्मचारियों में भारी नाराजगी फैल गई। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में कर्मचारी एकत्र हो गए और उन्होंने विजिलेंस की कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। कर्मचारियों का आरोप था कि कार्रवाई एकतरफा और गलत तरीके से की गई है। विरोध बढ़ता गया और देखते ही देखते कर्मचारियों ने तहसील परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला लगा दिया ताकि विजिलेंस टीम गिरफ्तार आरोपियों को लेकर बाहर न जा सके। बताया जा रहा है कि यह पूरा घटनाक्रम बुधवार दोपहर लगभग 3:45 बजे शुरू हुआ। गेट पर ताला लगाए जाने के बाद विजिलेंस अधिकारी, उनके साथ मौजूद कर्मचारी और गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी तहसील भवन के अंदर ही फंस गए। रात बीतने के बाद भी गतिरोध समाप्त नहीं हुआ और अगले दिन तक भी स्थिति जस की तस बनी रही। इस तरह विजिलेंस टीम लगभग 20 घंटे से अधिक समय तक तहसील परिसर के भीतर ही रुकी रही।

घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस विभाग भी सक्रिय हो गया। हालात को देखते हुए देर रात ही बड़ी संख्या में पुलिस बल सितारगंज तहसील परिसर में तैनात कर दिया गया। पूरे परिसर को पुलिस छावनी में बदल दिया गया ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे और कर्मचारियों को समझाकर ताला खुलवाने का प्रयास किया गया। प्रशासन की ओर से कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। उनका कहना था कि विजिलेंस की कार्रवाई निष्पक्ष नहीं है और उनके साथ अन्याय किया गया है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि बिना उनकी बात सुने और उचित प्रक्रिया का पालन किए गिरफ्तारी की गई है। हालांकि विजिलेंस अधिकारियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। विजिलेंस विभाग ने स्पष्ट किया कि पूरी कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ ट्रैप कार्रवाई केवल शिकायत के आधार पर नहीं की जाती, बल्कि पहले विस्तृत जांच की जाती है और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ही कार्रवाई की जाती है। विभाग का कहना है कि दोनों कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है और इस संबंध में सभी आवश्यक प्रमाण मौजूद हैं।

घटना के बाद पूरे जिले में राजस्व विभाग के कर्मचारियों के बीच भी हलचल बढ़ गई। जैसे-जैसे मामले की जानकारी अन्य तहसीलों तक पहुंची, विभिन्न स्थानों से राजस्व कर्मी और पटवारी संघ के सदस्य सितारगंज पहुंचने लगे। कई कर्मचारी अपने साथियों के समर्थन में धरना देने की तैयारी करने लगे। इससे प्रशासन की चिंता और बढ़ गई कि कहीं यह विरोध प्रदर्शन और बड़ा रूप न ले ले। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया और वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर भेजा। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि कानून को अपने हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। यदि किसी को कार्रवाई पर आपत्ति है तो वह कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी बात रख सकता है। यह मामला केवल रिश्वतखोरी तक सीमित नहीं रह गया।

बल्कि सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और कर्मचारियों के विरोध के बीच टकराव का बड़ा उदाहरण बन गया है। एक ओर विजिलेंस विभाग भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर तहसील कर्मचारी कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी कार्यालयों में अनुशासन को लेकर भी कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी
जांच एजेंसी
की कार्रवाई को रोकने या सरकारी अधिकारियों को जबरन परिसर में रोककर रखने की पुष्टि होती है, तो यह गंभीर कानूनी मामला भी बन सकता है। वहीं दूसरी ओर यदि कर्मचारियों के आरोपों में कोई तथ्य पाया जाता है तो उसकी भी स्वतंत्र जांच की जा सकती है। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया का पालन बेहद आवश्यक होगा। फिलहाल सितारगंज तहसील में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। पुलिस और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। विजिलेंस विभाग ने संकेत दिए हैं कि भ्रष्टाचार के मामलों में आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं कर्मचारी संगठन भी अपने रुख पर कायम हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला प्रशासनिक और कानूनी दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है।
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