जबलपुर: मध्य प्रदेश में ट्विषा शर्मा की मौत के मामले को लेकर अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह ने जांच और आरोपों के स्वरूप पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब मामले में जमानत याचिका दायर की गई थी, उस समय सरकार की ओर से इसे दहेज मृत्यु का मामला बताया गया था। वकील के मुताबिक, दहेज मृत्यु को कानूनन गंभीर अपराध माना जाता है।
सुरेंद्र सिंह ने दावा किया कि बाद में जब मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंपी गई, तो जांच एजेंसी की ओर से यह कहा गया कि मामला दहेज मृत्यु का नहीं है। उनका कहना है कि इससे कथित अपराध की गंभीरता कम हो गई। हालांकि, यह अधिवक्ता का पक्ष है और मामले की जांच तथा अदालत में सामने आए तथ्यों के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
ट्विषा शर्मा की मौत का मामला मध्य प्रदेश के भोपाल से जुड़ा है। 12 मई 2026 को 33 वर्षीय ट्विषा अपने ससुराल में मृत मिली थीं। शुरुआती पुलिस कार्रवाई के बाद मामले में दहेज मृत्यु और क्रूरता समेत धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई थी। बाद में मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंप दी।
CBI ने मामले में ट्विषा के पति समर्थ सिंह और उनकी मां गिरीबाला सिंह के खिलाफ संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की थी। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2), 85 और 3(5) तथा दहेज निषेध अधिनियम की धाराएं शामिल हैं। वहीं, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मई 2026 में गिरीबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया था। अदालत ने केस डायरी और आरोपों पर विचार करते हुए आदेश पारित किया था। मामले की जांच CBI द्वारा जारी है और अदालत में अलग-अलग पक्षों की दलीलें सामने आ रही हैं।
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