बलिया। बलिया की 7 साल की रागिनी की मासूम अपील अब मुख्यमंत्री तक पहुंच गई है। एक पैर के सहारे स्कूल जाने वाली बच्ची के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी। जिला अस्पताल में जांच के बाद उसे बेहतर इलाज और जरूरी जांचों के लिए BHU भेजने का फैसला हुआ है। वहीं, फिजिक्स वाला के सह-संस्थापक अलख पांडेय ने बच्ची के इलाज के लिए 10 लाख रुपये की मदद भेजी है।
‘DM अंकल, मुझे साइकिल दिला दीजिए...’
बलिया के मनियर ब्लॉक की 7 साल की रागिनी इन दिनों चर्चा में है। वजह उसकी कोई बड़ी उपलब्धि नहीं, बल्कि पढ़ने की ऐसी इच्छा है, जिसने लोगों का दिल छू लिया। रागिनी एक पैर के सहारे स्कूल जाती है। घर से स्कूल की दूरी महज 400 मीटर है, लेकिन उसके लिए यह रास्ता बेहद मुश्किल है।
रास्ते में चलते-चलते वह कई बार थक जाती है। दर्द बढ़ने पर जमीन पर बैठकर रोने लगती है। स्कूल जाने की इसी परेशानी से परेशान होकर रागिनी ने 31 अगस्त को डीएम से साइकिल दिलाने की अपील की थी। उसने मासूमियत से कहा था- *‘DM अंकल, मेरा एक पैर खराब है, मुझे एक साइकिल दिलवा दीजिए। मैं बहुत पढ़ाई करूंगी।’* रागिनी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद उसकी मदद के लिए कई लोग आगे आए।
डीएम ने घर पहुंचकर दी दो ट्राइसाइकिल
रागिनी की अपील सामने आने के बाद डीएम मंगला प्रसाद सिंह बुधवार को उसके घर पहुंचे। उन्होंने बच्ची को सिर्फ एक नहीं, बल्कि दो ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराईं। इसके साथ जरूरत का सामान देने और परिवार की अन्य परेशानियों में मदद का भरोसा भी दिया। साइकिल मिलने के बाद रागिनी ने बेहद मासूम जवाब दिया था- *‘मुझे साइकिल मिल गई, अब और कुछ नहीं चाहिए।’*
लेकिन इसके बाद उसकी कहानी ने एक और मोड़ लिया। बच्ची की समस्या केवल स्कूल आने-जाने की नहीं थी। उसके पैर की हालत देखकर उसके बेहतर इलाज की जरूरत महसूस हुई।
CM तक पहुंची बात, अब सरकार उठाएगी इलाज का खर्च
गुरुवार को रागिनी का जिला अस्पताल में मेडिकल कराया गया। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. करण सिंह चौहान ने सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय की मौजूदगी में बच्ची के पैर की जांच की।
जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि बच्ची के पैर से जुड़ी कुछ जरूरी जांचें बलिया में संभव नहीं हैं। इसलिए उसे वाराणसी स्थित BHU भेजने का फैसला लिया गया। परिवार की सहमति से तय हुआ कि शनिवार को रागिनी को आगे की जांच के लिए वाराणसी ले जाया जाएगा।
डीएम ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि बच्ची के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी। प्रशासन की कोशिश है कि डॉक्टरों की सलाह के अनुसार ऑपरेशन या अन्य जरूरी उपचार के जरिए बच्ची की स्थिति में सुधार किया जा सके।
बचपन में हुआ था फ्रैक्चर, नहीं जुड़ पाया पैर
सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय के मुताबिक, शुरुआती जांच में पता चला है कि बचपन में रागिनी के पैर में फ्रैक्चर हुआ था, लेकिन वह घुटने के पास ठीक तरह से जुड़ नहीं पाया। समय के साथ पैर की मांसपेशियां कमजोर होती गईं और पंजे की स्थिति भी प्रभावित हुई। अब BHU में होने वाली विस्तृत जांच के बाद ही डॉक्टर तय करेंगे कि रागिनी के लिए कौन सा इलाज सबसे बेहतर रहेगा। डॉक्टरों को उम्मीद है कि उचित उपचार से उसकी स्थिति में सुधार किया जा सकता है।
अलख पांडेय ने भेजे 10 लाख रुपये
रागिनी की कहानी सोशल मीडिया के जरिए फिजिक्स वाला के सह-संस्थापक और CEO अलख पांडेय तक भी पहुंची। वीडियो देखने के बाद उन्होंने बच्ची के इलाज के लिए 10 लाख रुपये की मदद* भेजी। अलख पांडेय ने बताया कि कई लोगों ने उन्हें रागिनी का वीडियो भेजा था। वीडियो देखकर उन्हें बच्ची की परेशानी का पता चला। इसके बाद उन्होंने उसके माता-पिता से फोन पर बात की और इलाज के लिए आर्थिक मदद देने का फैसला किया। रागिनी की मां बबीता देवी के मुताबिक, अलख पांडेय ने फोन पर उनसे बात की और कहा कि उनके खाते में इलाज के लिए 10 लाख रुपये भेजे गए हैं। उन्होंने बच्ची का अच्छे से इलाज कराने की अपील भी की।
छह महीने की उम्र में हादसे में घायल हुई थी रागिनी
बबीता देवी ने बताया कि रागिनी करीब छह महीने की थी, जब उसकी तबीयत खराब हुई थी। वह बच्ची को गोद में लेकर दवा लेने जा रही थीं। इसी दौरान रास्ते में हादसा हो गया और रागिनी के पैर में गंभीर चोट आई। परिवार ने कई जगह इलाज कराया, लेकिन पैर पूरी तरह ठीक नहीं हो सका। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार महंगे इलाज का खर्च उठाने में भी सक्षम नहीं था। रागिनी के पिता हैदराबाद में मजदूरी करते हैं। अब रागिनी की कहानी ने लोगों का ध्यान खींचा है। साइकिल मांगने वाली बच्ची को साइकिल तो मिल गई, लेकिन उससे भी बड़ी उम्मीद अब उसके पैर के इलाज से जुड़ गई है। रागिनी ने डीएम से कहा है कि उनका भरोसा कायम रहे और वह जल्द अपने पैरों पर खड़ी होकर स्कूल जा सके।
Tags: