जमानत की मांग पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी, हो रही काफी चर्चा
वजन बढ़ा है तो जेल में रहो, घट जाएगा....
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बेला त्रिवेदी ने बेल के एक मामले की सुनवाई करते हुए ऐसी टिप्पणी की, जिस पर काफी चर्चा हो रही है। आरोपी महिला के वकील ने बेल की मांग करते हुए कहा था कि उनकी क्लाइंट का वजन बहुत अधिक है। उन्हें हिरासत से राहत मिलनी चाहिए और बेल पर जेल से निकाला जाए। इस पर जस्टिस बेला त्रिवेदी ने कहा कि क्या ऐसी दलील बेल के लिए दी जा सकती है या फिर बेल का यह कोई आधार हो सकता है? इस पर वकील ने कहा कि उनकी क्लाइंट बीमार रहती हैं और कई समस्याओं से पीड़ित हैं। इस पर जस्टिस बेला त्रिवेदी ने कहा, 'उन्हें कस्टडी में ही रहने दिया जाए ताकि उनका वजन कम हो सके।'
जस्टिस त्रिवेदी पहले भी बेल के मामलों को कड़ा रुख अपना चुकी हैं। उन्होंने मई 2024 में बेल के एक केस की सुनवाई करते हुए कहा था कि बेल के मामलों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट को नहीं करनी चाहिए। उनका कहना था, 'बेल के मामलों में सुप्रीम कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए। यह मेरी राय है। बेल के केसों को हाई कोर्ट पर ही छोड़ देना चाहिए। ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट तो बेल कोर्ट बन गया है।' जस्टिस बेला त्रिवेदी की इस टिप्पणी की सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने आलोचना पर भी की है। कई एक्स यूजर्स ने लिखा कि जस्टिस की ऐसी निजी टिप्पणी ठीक नहीं थी। उन्हें केस पर बात करनी चाहिए किसी आरोपी के शरीर को लेकर ऐसी टिप्पणी करना असंवेदनशीलता है और उनके न्यायिक काम से परे की चीज है।