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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 5 सितंबर को होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दिल्ली मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल आशंका के आधार पर प्रदर्शन पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। CJP ने छात्रों से जुड़ी लंबित मांगों को लेकर दोबारा मार्च निकालने का ऐलान किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मार्च पर रोक लगाने से किया इनकार
नई दिल्ली। 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मार्च को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा मानने के लिए ठोस आधार नहीं है कि प्रस्तावित मार्च से कोई अप्रिय घटना जरूर होगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान प्रशासन से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि प्रदर्शन से जुड़े सभी पक्ष जिम्मेदारी से और कानून के दायरे में रहकर काम करें।
यह मामला रिटायर्ड दिल्ली पुलिस अधिकारी राजेंद्र सिंह की ओर से दायर याचिका के जरिए अदालत के सामने आया था। याचिकाकर्ता ने दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन का हवाला देते हुए बड़े जुलूस और प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने की मांग की थी।
CJP ने चार मांगों में से तीन अधूरी होने का दावा किया
CJP का कहना है कि सरकार के साथ पहले हुई बातचीत के बावजूद उसकी चार प्रमुख मांगों में से तीन अभी पूरी नहीं हुई हैं। संगठन ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार पर अपने आश्वासनों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। CJP के मुताबिक, उनकी प्रमुख मांगों में छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना, छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेना और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करना शामिल है। इसके अलावा संगठन ने RAF और दिल्ली पुलिस से माफी की मांग भी रखी है।
पार्टी का कहना है कि सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के बावजूद जब मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, तो उसे दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। संगठन ने अपने समर्थकों और लोगों से 5 सितंबर के मार्च में शामिल होने की अपील भी की है।
NEET परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर शुरू हुआ था आंदोलन
CJP ने NEET पेपर लीक और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों से जुड़ी मांगों को लेकर 20 जून से जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया था। आंदोलन के दौरान संगठन ने छात्रों के हितों से जुड़े कई मुद्दे उठाए थे। 25 जुलाई को सरकार की ओर से आश्वासन मिलने के बाद CJP ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया था। इसी दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का भी संगठन ने उल्लेख किया था।
25 जुलाई को CJP नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। इस बैठक में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच उनकी मांगों को लेकर सहमति बनने की बात कही गई थी। हालांकि, बाद में संगठन ने दावा किया कि सहमति के बावजूद कई मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई।
5 सितंबर को इंडिया गेट से निकलेगा मार्च
CJP की ओर से घोषित कार्यक्रम के मुताबिक, 5 सितंबर का मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर नई दिल्ली स्थित पुलिस मुख्यालय तक जाएगा। संगठन ने कहा है कि इस मार्च में उन छात्रों के परिजन भी शामिल होंगे, जिनकी मौत NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या के रूप में बताई गई है। CJP की वर्किंग कमेटी की 24 अगस्त को हुई वर्चुअल बैठक के बाद इस मार्च का फैसला लिया गया था। संगठन का आरोप है कि सरकार ने छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने की बात कही थी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ।
CJP ने सरकार को लेकर कहा कि उसके धैर्य को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। संगठन का कहना है कि लंबित मांगों को लेकर वह फिर से दिल्ली में प्रदर्शन करेगा।
20 जुलाई के संसद मार्च में हुआ था पुलिस से टकराव
इससे पहले 20 जुलाई को CJP ने संसद की ओर मार्च निकालने की कोशिश की थी। उस मार्च के लिए दिल्ली पुलिस की अनुमति नहीं मिली थी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और लाठीचार्ज को लेकर विवाद खड़ा हुआ था।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए एक हाई पावर्ड कमेटी गठित की। 20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने पांच सदस्यीय कमेटी के सदस्यों के नाम घोषित किए थे। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी को सौंपी गई है। कमेटी में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शलिंदर कौर, CBI के पूर्व डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड DGP डॉ. एलआर बिश्नोई को शामिल किया गया है।
अब 5 सितंबर को प्रस्तावित CJP मार्च पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शन में शामिल सभी पक्षों से कानून के अनुसार व्यवहार सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी याद दिलाई है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मार्च की तैयारियों और प्रशासन की व्यवस्था पर नजर रहेगी।
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