इंदौर। इंदौर नगर निगम ने ‘स्वच्छता ही सेवा अभियान 2026’ के तहत सरकारी स्कूलों में RRR लाइब्रेरी शुरू करने की पहल की है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत बढ़ाने के साथ-साथ वस्तुओं के पुनः उपयोग और संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना है। ‘रीड, रीयूज़, रिपीट’ यानी पढ़ें, दोबारा इस्तेमाल करें और दोहराएं की थीम पर आधारित इस पहल की शुरुआत मल्हारगंज स्थित सरकारी शारदा गर्ल्स स्कूल से की गई।

इस कार्यक्रम का शुभारंभ एडिशनल कमिश्नर प्रखर सिंह ने किया। शारदा गर्ल्स स्कूल में बनाई गई RRR लाइब्रेरी में करीब 2,100 किताबें उपलब्ध कराई गई हैं। इन किताबों का उपयोग छात्राएं पढ़ाई, सामान्य ज्ञान, साहित्य और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए कर सकेंगी।

इंदौर नगर निगम का उद्देश्य केवल पुस्तकालय सुविधा उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि छात्रों को यह समझाना भी है कि उपयोग में आने वाली वस्तुओं को दोबारा इस्तेमाल कर संसाधनों की बचत की जा सकती है। इसी सोच के तहत शहर के कई अन्य सरकारी स्कूलों में भी इसी तरह की RRR लाइब्रेरी शुरू की गई हैं।

RRR का अर्थ है रीड, रीयूज़ और रिपीट। इस मॉडल के जरिए ऐसी किताबों और वस्तुओं को दोबारा उपयोग में लाया जा रहा है, जो किसी व्यक्ति के लिए अनुपयोगी हो चुकी हैं, लेकिन दूसरे लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। इससे एक तरफ संसाधनों की बर्बादी कम होती है, वहीं दूसरी ओर बच्चों को कम लागत में पढ़ने के लिए सामग्री मिलती है।

नगर निगम ने इस पहल को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा है। अधिकारियों का मानना है कि पढ़ाई और पर्यावरण जागरूकता को एक साथ जोड़कर बच्चों में लंबे समय तक सकारात्मक आदतें विकसित की जा सकती हैं।

शहर में 1 सितंबर से खास RRR अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके तहत नागरिक 15 RRR सेंटरों पर ऐसी किताबें और प्लास्टिक जमा कर सकते हैं जिनका वे अब इस्तेमाल नहीं करते। बदले में उन्हें पौधे दिए जा रहे हैं।

अभियान को शहरवासियों से अच्छा समर्थन मिल रहा है। अब तक इन सेंटरों पर कुल 1,310 किलोग्राम प्लास्टिक और 18,503 किताबें जमा की जा चुकी हैं। इसके बदले नगर निगम की ओर से 5,077 पौधे नागरिकों को वितरित किए गए हैं।

इस पहल की खास बात यह है कि इसमें स्वच्छता, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण तीनों को एक साथ जोड़ा गया है। नागरिकों से बेकार प्लास्टिक और पुरानी किताबें ली जा रही हैं, जबकि बदले में उन्हें पौधे देकर हरियाली बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

जमा की गई किताबों को छांटकर ऐसी पुस्तकों को स्कूलों और जरूरतमंद संस्थानों तक पहुंचाया जा रहा है, जो अभी भी अच्छी स्थिति में हैं। इस प्रक्रिया से एक ही किताब कई विद्यार्थियों के काम आ सकती है।

सरकारी स्कूलों में RRR लाइब्रेरी शुरू होने से उन विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनके पास घर पर पर्याप्त किताबें उपलब्ध नहीं हैं। स्कूल में अतिरिक्त किताबें मिलने से बच्चों की पढ़ने की रुचि बढ़ सकती है और पाठ्यक्रम से बाहर की जानकारी हासिल करने का अवसर भी मिलेगा।

नगर निगम की इस पहल का एक और उद्देश्य छात्रों में जिम्मेदार उपभोग की आदत विकसित करना है। बच्चों को यह बताया जा रहा है कि हर वस्तु को इस्तेमाल के बाद फेंक देना जरूरी नहीं है। बहुत सी चीजों को दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है।

प्लास्टिक संग्रह अभियान भी इसी सोच का हिस्सा है। प्लास्टिक कचरा शहरों में स्वच्छता और पर्यावरण दोनों के लिए चुनौती बना हुआ है। ऐसे में इसे व्यवस्थित रूप से एकत्र कर पुनर्चक्रण की दिशा में भेजना नगर निगम की रणनीति का हिस्सा है।

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि RRR सेंटरों को केवल संग्रह केंद्र नहीं, बल्कि नागरिक सहभागिता के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां लोग किताबें, प्लास्टिक और अन्य उपयोगी वस्तुएं देकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकते हैं।

शारदा गर्ल्स स्कूल में शुरू हुई लाइब्रेरी में उपलब्ध 2,100 पुस्तकों को विद्यार्थियों की अलग-अलग जरूरतों के अनुसार रखा गया है। स्कूल प्रशासन भी छात्रों को नियमित रूप से लाइब्रेरी का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

इस पहल से बच्चों में किताबें साझा करने और उन्हें संभालकर रखने की आदत भी विकसित हो सकती है। जब छात्र यह समझेंगे कि उनके द्वारा उपयोग की गई पुस्तक आगे किसी दूसरे विद्यार्थी के काम आ सकती है, तो संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी।

नगर निगम अब इस मॉडल को ज्यादा स्कूलों तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। जिन स्कूलों में पुस्तकालय संसाधन सीमित हैं, वहां RRR अभियान के माध्यम से जुटाई गई किताबों का उपयोग किया जा सकता है।

स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत इंदौर नगर निगम पहले से ही कई जनभागीदारी कार्यक्रम चला रहा है। RRR लाइब्रेरी इसी श्रृंखला की नई पहल है, जिसमें बच्चों को सीधे जोड़ा गया है।

शहर में अब तक 18 हजार से अधिक किताबों का संग्रह होना भी यह बताता है कि नागरिक इस अभियान में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं। वहीं 1,310 किलोग्राम प्लास्टिक जमा होना पर्यावरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

5,077 पौधों के वितरण से शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने का संदेश भी दिया जा रहा है। नगर निगम चाहता है कि लोग पौधे लेकर केवल उन्हें लगाएं ही नहीं, बल्कि उनकी नियमित देखभाल भी करें।

फिलहाल इंदौर के सरकारी स्कूलों में शुरू हुई RRR लाइब्रेरी शिक्षा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने की कोशिश के रूप में सामने आई है। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो आने वाले समय में इसे और अधिक स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों तक बढ़ाया जा सकता है।

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