दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने देश में लोकतांत्रिक अधिकारों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि भारत में अघोषित आपातकाल जैसी परिस्थितियां बन गई हैं। वांगचुक ने चेतावनी दी है कि यदि रविवार तक हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं किया गया, तो वह अनशन या पदयात्रा शुरू करने पर विचार कर सकते हैं। शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में सोनम वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को जब उन्होंने लोगों से शांति और एकता बनाए रखने की अपील की थी, तब उन्हें अंदाजा नहीं था कि अगले दिन इतनी बड़ी संख्या में नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जाएगा।
वांगचुक ने अपने पोस्ट में लिखा, "भारत अघोषित आपातकाल की स्थिति में है। कल जब मैंने आज के प्रदर्शन में एकता और शांति की अपील करते हुए संदेश पोस्ट किया था, तब मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अघोषित आपातकाल की स्थिति में होगा। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें खुशी थी कि आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए कई नेता सामने आए हैं। हालांकि, बाद में उन्हें जानकारी मिली कि उन नेताओं को हिरासत में ले लिया गया है। वांगचुक ने उम्मीद जताई कि प्रशासन जल्द ही हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करेगा।
सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि रविवार तक प्रदर्शनकारियों की रिहाई नहीं होती है, तो उन्हें अनशन या पदयात्रा जैसे शांतिपूर्ण विरोध के तरीकों पर विचार करना पड़ेगा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांति और एकजुटता बनाए रखने की अपील भी की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शनिवार को दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी के अलग-अलग इलाकों में करीब 3,500 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी। ये लोग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जा रहे थे।
यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का विरोध कर रहे थे। उनकी प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा थी। हालांकि, एसआईआर में अनियमितताओं के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। दिल्ली की सीमाओं पर अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोकने के लिए विभिन्न स्थानों पर निगरानी और सुरक्षा संबंधी कदम उठाए।
प्रदर्शन के कारण सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के प्रभावित होने की भी जानकारी सामने आई। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, भारतीय रेलवे ने दिल्ली आने वाली कई ट्रेनों को रद्द किया और कुछ के समय में बदलाव किया। वहीं, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की ओर से सुरक्षा कारणों से 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद किए जाने की जानकारी दी गई। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को स्पष्ट किया था कि सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस के अनुसार, आयोजकों ने पिछले प्रदर्शन के दौरान दिए गए आश्वासनों और कानूनी निर्देशों का पालन नहीं किया था। इसी आधार पर पुलिस ने प्रदर्शन को अनुमति नहीं देने की बात कही थी।
शनिवार को सीजेपी के नेताओं अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई। ये नेता जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को गुरुग्राम स्थित उनके आवास से हिरासत में लिए जाने का दावा भी सामने आया। सीजेपी के सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, शनिवार सुबह करीब आठ बजे सादे कपड़ों में लगभग 50 पुलिसकर्मी उनके आवास पर पहुंचे और उन्हें एहतियातन हिरासत में ले लिया। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है।
फिलहाल सोनम वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों की रिहाई को लेकर रविवार तक का समय दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि रिहाई नहीं होने की स्थिति में वह शांतिपूर्ण विरोध के अगले कदम पर विचार करेंगे। अब यह देखना होगा कि हिरासत में लिए गए लोगों के संबंध में प्रशासन आगे क्या निर्णय लेता है।
Tags: