एसआईटी के अन्य सदस्यों में बीड की स्थानीय अपराध शाखा के सहायक पुलिस निरीक्षक विजय सिंह शिवलाल जोनवाल और उप निरीक्षक महेश विघ्ने के अलावा केज के उप निरीक्षक आनंद शंकर शिंदे, सहायक सब इंस्पेक्टर तुलसीराम जगताप, पुलिस कांस्टेबल मनोज राजेंद्र वाघ, पुलिस नायक चंद्रकांत एस. कलकुंटे, पुलिस नायक बालासाहेब देवीदास अखाबरे और पुलिस कांस्टेबल संतोष भगवानराव गित्ते भी शामिल हैं। संतोष देशमुख हत्याकांड की जांच फिलहाल सीआईडी कर रही है और इस मामले में अब तक 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। दो करोड़ रुपये की रंगदारी और हत्या के बीच संबंधों को लेकर जांच की जा रही है।
सीआईडी की टीम सभी कॉल रिकॉर्ड, सीडीआर की जांच कर रही है। सीआईडी ने इस मामले में पूछताछ के लिए तीन और लोगों को बुलाया है। इस हत्याकांड के कुछ आरोपी अभी भी फरार हैं, उनकी भी सीआईडी तलाश कर रही है। सरकार द्वारा एसआईटी गठन की घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब संतोष देशमुख की हत्या से जुड़े रंगदारी मामले में वांछित बीड से एनसीपी मंत्री धनंजय मुंडे के करीबी वाल्मिक कराड ने मंगलवार को पुणे में सीआईडी के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
कराड के खिलाफ रंगदारी का मामला दर्ज किया गया है। बीड जिले की केज कोर्ट ने उसे 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की कि सरकार इस मामले में दोषी किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शेगी। उन्होंने कहा, "मैं पहले दिन से ही कह रहा हूं कि संतोष देशमुख हत्याकांड के हर आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी इस तरह की हिंसा करने का अधिकार नहीं है। जब तक सभी दोषियों को फांसी नहीं हो जाती, पुलिस जरूरी कार्रवाई करेगी।" उन्होंने कहा, "हम गुंडों का राज नहीं चलने देंगे। कोई भी इस तरह की हिंसा नहीं कर सकता, कोई भी फिरौती नहीं मांग सकता। इसी के तहत हमने जांच तेज कर दी है और इसी वजह से वाल्मिक कराड को सरेंडर करना पड़ा। अब हत्या के फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए अलग-अलग टीमें काम पर लग गई हैं। हम किसी भी आरोपी को नहीं छोड़ेंगे। सभी को ढूंढ निकाला जाएगा।"