Shimla. शिमला। हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने सात और सरकारी स्कूलों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध किया है। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार शिक्षा विभाग ने इन वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को सीबीएसई में शामिल करने की मंजूरी दे दी है और यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार अब इन विद्यालयों में पढ़ाई सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुरूप होगी। इससे विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्रणाली का लाभ मिलेगा और उनकी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद होगी। विभाग ने कहा कि इस कदम से विद्यार्थियों का शैक्षिक स्तर मजबूत होगा और उन्हें व्यापक स्तर पर अध्ययन का अवसर मिलेगा।
सरकारी स्कूलों को सीबीएसई में शामिल करने का उद्देश्य प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना और विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करना है। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के छात्र भी राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा और प्रतिस्पर्धा में भाग ले सकेंगे।
इस अवसर पर शिक्षा विभाग ने कहा कि चयनित स्कूलों में पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति और परीक्षा प्रणाली को सीबीएसई के मानकों के अनुसार तैयार किया जाएगा। शिक्षकों को आवश्यक प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार हो और विद्यार्थियों को नई प्रणाली के अनुरूप मार्गदर्शन मिल सके।
इस कदम से प्रदेश के शिक्षा ढांचे में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इससे न केवल छात्रों के शैक्षिक स्तर में सुधार होगा, बल्कि राज्य में शिक्षा का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानक भी बढ़ेगा।
शामिल किए गए स्कूल:
बलदवाड़ा, जिला मंडी
कोलनी धलवान, जिला मंडी
भदेरवार, जिला मंडी
भुंतर, जिला कुल्लू
रैली जजरी, जिला हमीरपुर
लोहारली, जिला हमीरपुर
हरिपुर गुलेर, जिला कांगड़ा
मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग ने कहा कि अब इन स्कूलों के छात्र राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई करेंगे। इससे उनके ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की संभावनाएं बढ़ेंगी। विभाग ने आश्वासन दिया कि आगामी समय में और अधिक स्कूलों को सीबीएसई में शामिल करने की योजना है, ताकि राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और अवसरों का विस्तार हो सके।
सरकारी स्कूलों को सीबीएसई में शामिल करने का यह कदम प्रदेश में शिक्षा सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली के अनुरूप मार्गदर्शन मिलेगा और वे अपने कैरियर की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकेंगे। शिक्षा विभाग ने कहा कि इस निर्णय से न केवल विद्यार्थियों का शैक्षिक स्तर बढ़ेगा, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था भी राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित होगी।