पूर्वी रेलवे (ईआर) के रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के तहत एक जनजागरूकता अभियान चलाया। इस दौरान रेलवे स्टेशनों और रेल पटरियों के आसपास रहने वाले लोगों, खासकर युवाओं से बातचीत कर उन्हें उन अवैध गतिविधियों के बारे में जागरूक किया गया, जो यात्रियों और उनके लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। इस तरह के कार्यक्रम पूर्वी रेलवे के सभी चार मंडलों हावड़ा, सियालदह, आसनसोल और मालदा में आयोजित किए गए। सुरक्षा कर्मियों ने चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने के खतरों और इसके कानूनी परिणामों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऐसी घटनाएं न केवल रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि यात्रियों को गंभीर चोट भी पहुंचा सकती हैं।
अधिकारियों ने कहा कि यह खतरा विशेष रूप से उपनगरीय ईएमयू लोकल ट्रेनों में अधिक होता है, क्योंकि इनमें बड़ी संख्या में यात्री दरवाजों के पास यात्रा करते हैं। एक अधिकारी ने कहा, "हाल के दिनों में कुछ युवाओं के सोशल मीडिया रील बनाने के लिए अवैध गतिविधियों में शामिल होने की खबरें सामने आई हैं। कुछ मामलों में उन्होंने चलती ट्रेनों पर पत्थर भी फेंके हैं। हमने लोगों को समझाया कि जिन ट्रेनों पर पत्थर फेंके जाते हैं, उनमें उनके रिश्तेदार और दोस्त भी यात्रा में शामिल हो सकते हैं। साथ ही उन्हें ऐसे कृत्यों के कानूनी परिणामों के बारे में भी बताया गया।"
लोगों को मानव तस्करी, बिना वजह अलार्म चेन खींचने, रेलवे ट्रैक पार करने (ट्रेसपासिंग) और अन्य अपराधों के बारे में भी जागरूक किया गया। उन्हें सलाह दी गई कि ट्रेनों या रेलवे ट्रैक के आसपास किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना हेल्पलाइन नंबर 139 पर दें।अधिकारियों ने बताया कि अलार्म चेन का गलत इस्तेमाल ट्रेनों के अनावश्यक विलंब का कारण बनता है। वहीं, वर्ष 2026 के पहले सात महीनों में पूर्वी रेलवे के क्षेत्राधिकार में ट्रैक पार करने के दौरान सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क वाहनों द्वारा अवैध रूप से रेलवे ट्रैक पार करने से बड़े हादसे हो सकते हैं, रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंच सकता है और रेल सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
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