नई तकनीक से उगाया रॉयल सेब बदलेगा तकदीर

Update: 2025-04-09 10:55 GMT
Shimla. शिमला। रॉयल डिलिशियस प्रजाति का एक फल है जो गहरे लाल रंग का होता है और इसका स्वाद अन्य किसी भी प्रजाति के सेब से अधिक होता है। इसमें रस भी सबसे अधिक होता है। सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह लंबे समय तक खराब नहीं होता और इसे वातानुकूलित स्टोर में 8 से 10 महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है, जबकि अन्य प्रजातियों में यह गुण नहीं पाया जाता। रॉयल सेब का पेड़ सामान्यत 8 से 10 वर्ष में फसल देना प्रारंभ कर
देता है।

यदि उचित देखभाल की जाए तो इसकी आयु लगभग 50 वर्ष या उससे कुछ अधिक होती है। इसके पेड़ का आकार काफी बड़ा होता है और कुछ पुराने वृक्षों की ऊंचाई तो 50 फुट से भी ऊपर देखी गई है। इसी कारण इसमें फल उत्पादन भी बता दें कि सर्वप्रथम एक अमेरिकी नागरिक सैमुअल इवान स्टोक्स ने कोटगढ़ क्षेत्र में रॉयल सेब को उगाया था। उसके बाद जैसे-जैसे सेब की खेती का क्षेत्र विस्तृत होता गया वैसे-वैसे रॉयल सेब को जिला शिमला एवं किन्नौर के अलावा अन्य स्थानों पर भी उगाया जाने लगा।
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