रियलिटी चेक में खुली स्लीपर बसों की पोल, नियमों को ठेंगा दिखा रहे ऑपरेटर
मौत का लाइसेंस बांटता विभाग
Delhi दिल्ली: देश के तमाम राज्यों में स्लीपर बसों के जरिये यात्रियों की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। नियमों और कानून को ताक पर रखकर बस ऑपरेटर परमिट की आड़ में यात्रियों से पूरा किराया वसूल रहे हैं, लेकिन सुरक्षा इंतजामों में लगातार कमी बरती जा रही है। 'आजतक' की पड़ताल में खुलासा हुआ कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और पंजाब में दौड़ रही स्लीपर बसों में यात्रियों की जान को खतरा है। टीम की जांच में यह सामने आया कि कई बस ऑपरेटर सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं, जबकि यात्रियों को सुरक्षा की गारंटी दी जा रही है। स्लीपर बसों में आग लगने या दुर्घटना होने की स्थिति में बचाव के कोई ठोस इंतजाम नहीं होते। इसके बावजूद, इन बसों को सालों तक ऑपरेशन का परमिट मिलता रहता है।
हालात और भयावह तब होते हैं जब ध्यान दें कि पिछले तीन वर्षों में संसद में स्वीकार किया गया कि देशभर में 64 यात्रियों की मौत बस में जिंदा जलने से हुई। इसके बावजूद राज्य और केंद्रीय स्तर पर बस ऑपरेटरों को नियंत्रित करने के ठोस कदम नहीं उठाए गए। 'आजतक' की टीम ने दिल्ली से राजस्थान, मध्य प्रदेश से पंजाब तक जाकर स्लीपर बसों में सुरक्षा इंतजामों का परीक्षण किया। कैमरे में कैद हुए दृश्यों ने यह साबित कर दिया कि यात्री किसी भी समय बड़े खतरे में हैं। यात्रियों के पास सुरक्षा उपकरण, इमरजेंसी गाइड और अग्निशमन साधन या तो अनुपस्थित हैं या काम नहीं कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्लीपर बसों के लंबे रूट, अधिक यात्रियों और रात के समय संचालन के कारण कोई भी दुर्घटना बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। इसके बावजूद कई राज्यों में परिवहन विभाग बसों को मानक सुरक्षा जांच के बिना ही परमिट जारी कर रहा है। केंद्रीय परिवहन मंत्री ने हाल ही में दावा किया कि नए नियम बनाकर स्लीपर बसों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी, लेकिन राज्य परिवहन विभागों से सवाल हैं कि वह कब तक यात्रियों की जान जोखिम में डालने वाले बस ऑपरेटरों को अनुमति देते रहेंगे।
उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और पंजाब के परिवहन मंत्रियों से इस संबंध में सवाल उठाए गए हैं कि आखिर जानलेवा बसों को परमिट देने की प्रक्रिया कब तक चलेगी। विशेषज्ञों और यात्रियों का कहना है कि अब समय आ गया है कि सख्त मानक लागू किए जाएं, परमिट प्रणाली को समीक्षा के तहत लाया जाए और नियमित निरीक्षण शुरू हो। नहीं तो भविष्य में हादसों की संख्या में और इजाफा होगा। इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि देश में स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह विफल है और यात्रियों की जान जोखिम में डाली जा रही है। कानून और नियमों की अनदेखी के चलते यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय बन गई है।