नई दिल्ली: अयोध्या स्थित राम मंदिर के संचालन और व्यवस्थाओं को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा फैसला लिया है। ट्रस्ट की अहम बैठक में रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को पहला CEO नियुक्त करने की मंजूरी दी गई है। वह मंदिर से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा, वित्तीय प्रबंधन और श्रद्धालुओं के दर्शन से संबंधित व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे।
जितेंद्र मिश्रा इसी साल 30 अप्रैल को भारतीय वायुसेना से रिटायर हुए हैं। उन्होंने करीब 39 साल तक वायुसेना में सेवाएं दीं। रिटायरमेंट से पहले वह एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में पश्चिमी वायु कमान की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
वायुसेना में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर काफी लंबा और महत्वपूर्ण रहा है। वायुसेना में सेवा के दौरान उन्होंने अलग-अलग operational और command पदों पर काम किया। वह MiG-21 फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर भी रहे।
इसके अलावा उन्होंने एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट में चीफ टेस्ट पायलट और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नासिक केंद्र में भी चीफ टेस्ट पायलट के तौर पर जिम्मेदारी संभाली। वह बरेली और पठानकोट की 15 और 18 विंग के एयर ऑफिसर कमांडिंग भी रहे।
जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप के डायरेक्टर, एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स के प्रिंसिपल डायरेक्टर और एयर हेडक्वार्टर में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ जैसे पदों पर भी सेवाएं दीं। वह ASTE के कमांडेंट और डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के पद पर भी रह चुके हैं।
3 हजार घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव
जितेंद्र मिश्रा को उड़ान और सैन्य अभियानों का लंबा अनुभव है। उन्होंने अपने करियर के दौरान 18 से ज्यादा प्रकार के फाइटर, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं। उनके पास करीब 3 हजार घंटे की उड़ान का अनुभव बताया गया है। 1 जनवरी 2025 से 30 अप्रैल 2026 तक उन्होंने पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में काम किया। इस दौरान वह वायुसेना की महत्वपूर्ण operational जिम्मेदारियों से जुड़े रहे।
ऑपरेशन सिंदूर में निभाई अहम भूमिका
जितेंद्र मिश्रा को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर यह सम्मान मिला था। इसके अलावा उन्हें 2024 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2013 में विशिष्ट सेवा मेडल भी प्रदान किया गया था। उनके सैन्य अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए राम मंदिर ट्रस्ट की नई जिम्मेदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से की पढ़ाई
जितेंद्र मिश्रा ने अपनी सैन्य शिक्षा और प्रशिक्षण कई प्रतिष्ठित संस्थानों से हासिल किया है। उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला और एयर फोर्स एकेडमी, डुंडीगल से प्रशिक्षण लिया। इसके बाद वह एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, बेंगलुरु से भी जुड़े रहे। उन्होंने अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, मोंटगोमरी से शिक्षा हासिल की। इसके अलावा यूनाइटेड किंगडम के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज में भी प्रशिक्षण लिया।
CEO के तौर पर क्या होगी जिम्मेदारी?
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO के रूप में जितेंद्र मिश्रा की भूमिका काफी व्यापक होगी। मंदिर परिसर की प्रशासनिक व्यवस्था के साथ सुरक्षा, वित्तीय प्रबंधन और श्रद्धालुओं के दर्शन से जुड़े कामों की निगरानी उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होगी।
राम मंदिर में लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और बड़े स्तर पर होने वाली व्यवस्थाओं को देखते हुए ट्रस्ट ने CEO के पद के लिए अनुभवी प्रशासनिक और नेतृत्व क्षमता वाले अधिकारी को जिम्मेदारी देने का फैसला किया है। अब जितेंद्र मिश्रा अपने लंबे सैन्य अनुभव का इस्तेमाल मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्थाओं को बेहतर ढंग से संचालित करने में करेंगे।
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