नसीरुद्दीन शाह पर पुनीत इस्सर का तीखा पलटवार
नसीरुद्दीन शाह के बयान पर पुनीत इस्सर ने उठाए सवाल
महाराष्ट्र। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के केंद्र सरकार और छात्र आंदोलनों को लेकर दिए गए बयान पर अभिनेता पुनीत इस्सर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह का सम्मान करते हुए कहा कि किसी भी मुद्दे पर बोलते समय चयनात्मक रवैया नहीं अपनाना चाहिए। पुनीत इस्सर ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना सभी का अधिकार है, लेकिन यदि किसी को सरकार पसंद नहीं है तो उसे चुनावी राजनीति में उतरकर जनता का समर्थन हासिल करना चाहिए।
'नसीरुद्दीन शाह हमारे शिक्षक रहे हैं, उनका सम्मान करते हैं'
मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान पुनीत इस्सर ने कहा कि नसीरुद्दीन शाह वरिष्ठ अभिनेता हैं और उनके शिक्षक भी रह चुके हैं। उन्होंने कहा, 'नसीरुद्दीन शाह साहब हमारे सीनियर हैं। वह हमारे शिक्षक रहे हैं। हम उनका सम्मान करते हैं और वह बहुत बेहतरीन कलाकार हैं। लेकिन मेरा सवाल केवल इतना है कि जब आप बोलते हैं तो चयनात्मक नहीं होना चाहिए। इस्सर ने सवाल उठाया कि देश और दुनिया के अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर कुछ लोग चुप क्यों रहते हैं, जबकि कुछ विशेष विषयों पर लगातार प्रतिक्रिया देते हैं।
वामपंथी विचारधारा को लेकर साधा निशाना
पुनीत इस्सर ने नसीरुद्दीन शाह के राजनीतिक विचारों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वह अक्सर वामपंथी और नक्सल समर्थक विचारधारा के नजरिए से घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने जेएनयू और तथाकथित 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में कुछ लोग दोषसिद्ध अपराधियों और जेल में बंद आतंकवाद के आरोपियों के समर्थन में आवाज उठाते हैं। हालांकि, ये पुनीत इस्सर के राजनीतिक आरोप और विचार हैं। इन्हें किसी विशेष व्यक्ति या छात्र समूह के खिलाफ स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
'सरकार पसंद नहीं तो राजनीति में उतरिए'
पुनीत इस्सर ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और सरकार की आलोचना करने का अधिकार है। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह को संबोधित करते हुए कहा कि यदि मौजूदा सरकार की नीतियों से असहमति है तो चुनाव लड़कर उसे हराने का प्रयास किया जा सकता है। इस्सर ने कहा, 'आपको अपने विचार व्यक्त करने और सरकार के खिलाफ बोलने का पूरा अधिकार है। लेकिन अगर आपको यह सरकार पसंद नहीं है तो राजनीति में आइए, चुनाव लड़िए, जीतिए और इस सरकार को हराइए। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार जनता द्वारा चुनी गई है और लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से सत्ता में आई है।
नसीरुद्दीन शाह ने खुद को बताया था 'दिमागी नक्सल'
इस विवाद की शुरुआत नसीरुद्दीन शाह के उस वीडियो बयान के बाद हुई, जिसमें उन्होंने खुद को गर्व से 'दिमागी नक्सल' बताया था। नसीरुद्दीन शाह ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर शिक्षा संस्थानों और युवाओं के प्रति अपनाए गए रवैये को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने जेएनयू, जामिया और सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट से जुड़े छात्र आंदोलनों का उल्लेख करते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चिंता जताई थी।