PM Modi Podcast: प्रधानमंत्री मोदी का पॉडकास्ट हुआ रिलीज, अमेरिकी पॉडकास्टर के साथ PM ने की खास बातें

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Update: 2025-03-16 12:23 GMT

नई दिल्ली:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीन घंटे लंबा पॉडकास्ट आ गया है। मशहूर अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन ने PM के साथ बात करने से पहले 45 घंटे का उपवास रखा। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लेक्स फ्रीडमैन के साथ पॉडकास्ट में आरएसएस से अपने जुड़ाव के बारे में बात की। उन्होंने कहा, 'मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मैंने RSS जैसे प्रतिष्ठित संगठन से जीवन का सार और मूल्य सीखा। मुझे उद्देश्यपूर्ण जीवन मिला।' उन्होंने कहा कि बचपन में RSS की सभाओं में जाना हमेशा अच्छा लगता था। मेरे मन में हमेशा एक ही लक्ष्य रहता था, देश के काम आना। यही संघ ने मुझे सिखाया। RSS इस साल 100 साल पूरे कर रहा है। आरएसएस से बड़ा कोई स्वयंसेवी संघ दुनिया में नहीं है।
पीएम मोदी ने कहा, 'RSS को समझना आसान काम नहीं है। इसके कामकाज को समझना होगा। यह अपने सदस्यों को जीवन का उद्देश्य देता है। यह सिखाता है कि राष्ट्र ही सब कुछ है और समाज सेवा ही ईश्वर की सेवा है। हमारे वैदिक संतों और स्वामी विवेकानंद ने जो सिखाया है, संघ भी यही सिखाता है। RSS के कुछ सदस्यों ने शिक्षा में क्रांति लाने के लिए विद्या भारती नामक संगठन की शुरुआत की। उनके देश भर में करीब 25 हजार स्कूल चलते हैं। एक समय में 30 लाख छात्र इन स्कूलों में पढ़ते हैं। वामपंथियों की ओर से प्रचारित श्रमिक आंदोलन 'दुनिया के मजदूरों, एक हो जाओ!' का नारा लगाते हैं, जबकि RSS का श्रमिक संगठन 'मजदूरों, दुनिया को एक करो!' का नारा लगाता है।'
नरेंद्र मोदी ने कहा कि बचपन में कुछ ना कुछ करते रहना मेरा स्वभाव था। उन्होंने कहा, 'हमारे यहां एक व्यक्ति आते थे जो डफली जैसा कुछ रखते थे और देशभक्ति के गीत सुनाते थे। उनकी आवाज बहुत अच्छी थी। अलग-अलग जगह पर उनके कार्यक्रम होते थे। मैं पागल की तरह उन्हें सुनने चला जाता था। मैं रात-रात भर देशभक्ति के गाने सुनता था। इसमें मुझे मजा आता था।'
पीएम नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन से खास बातचीत की। पीएम मोदी ने अपने बचपन से लेकर, आरआसएस से गहरे जुड़ाव और पाकिस्तान से भारत के हालिया सबंध समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। पीएम मोदी ने बताया कि पीएम बनने के बाद शपथ ग्रहण के बाद मैंने पाकिस्तान को बुलाया था, ताकि शुभ शुरुआत हो। हर अच्छे प्रयासों का परिणाम नकारात्मक निकला। हम आशा करते हैं कि हर बार सद्बुद्धि मिलेगी और सुख-शांति की राह पर जाएंगे। वहां की आवाम भी काफी परेशान है।
पीएम मोदी ने अपने गरीब बचपन की बातें बताते हुए कहा कि गरीबी उनके लिए कभी भी कठिनाई नहीं रही। उन्होंने बताया कि हालांकि वह गरीब थे, लेकिन उन्हें कभी भी अभाव का अहसास नहीं हुआ। एक किस्सा याद करते हुए उन्होंने बताया कि उनके चाचा ने एक बार उन्हें सफेद कैनवस जूते तोहफे में दिए थे, जिन्हें उन्होंने स्कूल से फेंके गए चॉक से पॉलिश किया। पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने जीवन के हर पहलू को कृतज्ञता के साथ अपनाया और कभी भी गरीबी को संघर्ष के रूप में नहीं देखा।
इंटरव्यू में पीएम मोदी ने बताया कि बचपन में वह अक्सर गांव की लाइब्रेरी जाते थे और वहां स्वामी विवेकानंद के बारे में पढ़ते थे, जिनकी शिक्षाओं ने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद से यह सीखा कि सच्ची संतुष्टि व्यक्तिगत उपलब्धियों से नहीं, बल्कि दूसरों की निःस्वार्थ सेवा से आती है। पीएम मोदी ने स्वामी विवेकानंद की एक घटना सुनाई, जिसमें स्वामी विवेकानंद ने श्री रामकृष्ण परमहंस से अपनी मां के इलाज के लिए मदद मांगी थी और परमहंस जी ने उन्हें देवी काली से मदद मांगने की सलाह दी। इस घटना ने विवेकानंद जी को यह समझाया कि जिस दिव्य शक्ति ने सब कुछ दिया है, उससे कुछ मांगने का अधिकार नहीं है। इसलिए मानवता की सेवा ही सबसे बड़ी भक्ति है।
प्रधानमंत्री मोदी ने संघ से अपने गहरे जुड़ाव पर बात करते हुए कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें इस महान संगठन का हिस्सा बनने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि संघ ने उन्हें जीवन का उद्देश्य और निःस्वार्थ सेवा के मूल्यों को सिखाया। पीएम मोदी ने संघ के कार्यों की सराहना करते हुए बताया कि वह देशभर में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संघ के श्रमिक संघ और वामपंथी श्रमिक संघ के बीच फर्क यह है कि वामपंथी संघ कहता है 'दुनिया के श्रमिकों, एकजुट हो जाओ', जबकि संघ का श्रमिक संघ कहता है 'श्रमिकों, दुनिया को एकजुट करो', यह दोनों के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
लेक्स फ्रिडमैन ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी मुलाकात के सम्मान में 45 घंटे तक केवल पानी पीकर उपवास रखा। इस दौरान पीएम मोदी ने उपवास के फायदों के बारे में बात की, जिसमें उन्होंने कहा कि यह हमारी इंद्रियों को तेज करता है, मानसिक स्पष्टता को बढ़ाता है और अनुशासन को बढ़ावा देता है। उन्होंने बताया कि उपवास केवल भोजन छोड़ने का मामला नहीं है, बल्कि यह एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो पारंपरिक और आयुर्वेदिक प्रथाओं से जुड़ी है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि उपवास से वह सुस्त महसूस नहीं करते, बल्कि इससे उन्हें अधिक ऊर्जा मिलती है और वह ज्यादा मेहनत करते हैं।
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