Delhi दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर उज्बेकिस्तान के ताशकंद पहुंचे हैं। एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और दोनों नेता गले मिले। यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी समेत कई अहम मुद्दों पर बातचीत होगी।
ताशकंद पहुंचते ही पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन की उज्बेकिस्तान यात्रा पर शनिवार को ताशकंद पहुंचे। एयरपोर्ट पर उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच इस दौरान गर्मजोशी देखने को मिली और उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाकर मुलाकात की। पीएम मोदी की यह उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा है। इस दौरे को भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ताशकंद पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री दोनों देशों के बीच सहयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री की यात्रा भारत की मध्य एशिया नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इस दौरान दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद सहयोग को आगे बढ़ाने और नए क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है।
व्यापार, रक्षा और ऊर्जा पर होगी बातचीत
पीएम मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत होगी। इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा रक्षा सहयोग, डिजिटल कनेक्टिविटी और ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। शिक्षा और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने के विषय भी बातचीत के एजेंडे में शामिल रहेंगे। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य की प्राथमिकताओं पर भी चर्चा की जाएगी। दोनों पक्ष यह तय करने की कोशिश करेंगे कि मौजूदा सहयोग को किस तरह नए क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया जाए। पीएम मोदी की इस यात्रा का एक उद्देश्य मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और साझेदारी को मजबूत करना भी है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच पुराने सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने क्या कहा
उज्बेकिस्तान के लिए रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी यात्रा को लेकर बयान जारी किया था। उन्होंने कहा था कि वह राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ व्यापार और निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा तथा ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर चर्चा करने के लिए उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री ने भारत और उज्बेकिस्तान के साझा विकास के विजन का भी जिक्र किया। उन्होंने ‘विकसित भारत’ और ‘यांगी उज़्बेकिस्तान’ यानी ‘नए उज्बेकिस्तान’ के साझा विजन को आगे बढ़ाने की बात कही। पीएम मोदी के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करने की जरूरत है। उनकी यात्रा के दौरान इसी दिशा में भविष्य की रूपरेखा पर बातचीत होगी।
शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी केंद्र भी जाएंगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज भी जाएंगे। यहां वह शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी केंद्र का दौरा करेंगे। इन दोनों स्थानों की यात्रा को भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने रवाना होने से पहले खुद इन कार्यक्रमों का उल्लेख किया था। भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों में सांस्कृतिक संपर्क की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में पीएम मोदी का इन स्थानों पर जाना दोनों देशों के बीच आपसी जुड़ाव को रेखांकित करता है।
उज्बेकिस्तान के बाद किर्गिज गणराज्य जाएंगे पीएम मोदी
उज्बेकिस्तान यात्रा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किर्गिज गणराज्य के बिश्केक जाएंगे। वह वहां राष्ट्रपति सादिर झापारोव के निमंत्रण पर 26वें शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस तरह प्रधानमंत्री की मौजूदा यात्रा दो देशों तक फैली हुई है। पहले चरण में वह उज्बेकिस्तान में राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय संबंधों को लेकर बातचीत करेंगे और इसके बाद किर्गिज गणराज्य में SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। उज्बेकिस्तान में प्रधानमंत्री की बैठकों में व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है। वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए दोनों देशों के पुराने संबंधों को भी महत्व दिया जा रहा है। ताशकंद पहुंचने पर राष्ट्रपति मिर्जियोयेव का पीएम मोदी को गले लगाकर स्वागत करना दोनों नेताओं के बीच संबंधों की गर्मजोशी को भी दर्शाता है। अब दोनों नेताओं की प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के बाद यह स्पष्ट होगा कि भारत और उज्बेकिस्तान भविष्य में किन क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाने पर सहमत होते हैं।
Tags: