PM मोदी राष्ट्रपति पुतिन को रिसीव करने पालम एयरपोर्ट पहुंचे

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Update: 2025-12-04 13:26 GMT
New Delhi. नई दिल्ली। भारत-रूस संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत सोमवार रात देखने को मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं पालम एयरपोर्ट पहुंचे और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का स्वागत किया। यह अवसर कूटनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पिछले एक दशक में ऐसे बेहद कम मौके आए हैं जब प्रधानमंत्री मोदी किसी विदेशी शीर्ष नेता को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे हों। यह कदम न केवल पुतिन के प्रति व्यक्तिगत गर्मजोशी को दर्शाता है, बल्कि दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक विश्वास को भी और मजबूत करता है।


राष्ट्रपति पुतिन का विमान भारत के एयरस्पेस में प्रवेश के साथ ही दिल्ली में सुरक्षा को हाई अलर्ट पर रखा गया।
पालम एयरपोर्ट
पर विशेष प्रोटोकॉल के साथ सुरक्षा और स्वागत की तैयारियां की गईं। राष्ट्रपति पुतिन के पहुंचते ही PM मोदी ने आगे बढ़कर उनसे गर्मजोशी से हाथ मिलाया और दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के साथ सौहार्दपूर्ण बातचीत की। इसके बाद दोनों एक ही कार से लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास के लिए रवाना हुए, जहां उनके बीच एक विशेष प्राइवेट डिनर निर्धारित है। इस दौर की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है।

क्योंकि भारत और रूस के बीच पारंपरिक सैन्य एवं सामरिक रिश्तों से आगे बढ़कर आर्थिक सहयोग के नए द्वार खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। ऊर्जा, व्यापार, नई तकनीक, परमाणु ऊर्जा, रक्षा उत्पादन और परिवहन अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर चर्चा हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह विज़िट भारत-रूस रिश्तों को “21वीं सदी के साझेदारी मॉडल” में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में भी इस मुलाकात को लेकर हलचल तेज है। अमेरिका और पश्चिमी देशों की नज़र इस दौरे पर टिकी हुई है, क्योंकि रूस-यूक्रेन संकट के बीच भारत का रूस के साथ बढ़ता सहयोग कई वैश्विक रणनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

पश्चिम जगत में कई विश्लेषक इस यात्रा को लेकर असहज हैं, जबकि पाकिस्तान जैसे देश इस बढ़ते सहयोग से स्पष्ट तौर पर चिंतित दिखाई दे रहे हैं। भारत की “मल्टी-वेक्टर फॉरेन पॉलिसी” के तहत यह दौरा दर्शाता है कि नई दिल्ली स्वतंत्र रणनीतिक फैसले लेने की दिशा में और भी दृढ़ है। प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल न केवल भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करेगी, बल्कि आर्थिक और सामरिक क्षेत्रों में नए अवसर भी पैदा करेगी। राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी की वार्ता से दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, आपसी व्यापार को बढ़ाने, रक्षा उत्पादन में संयुक्त सहयोग और वैश्विक दक्षिण (Global South) के मुद्दों पर साझा रणनीति को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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