475 करोड़ की सोना तस्करी में DRI की जांच तेज, हवाला ऑपरेटरों तक पहुंची एजेंसी
मुंबई। डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस यानी DRI ने बड़े सोना तस्करी सिंडिकेट की जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। एजेंसी अब उन हवाला ऑपरेटरों की भूमिका भी खंगाल रही है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने तस्करी के जरिए भारत लाए गए सोने की गैर-कानूनी बिक्री से कमाए गए पैसे को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में मदद की। जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क में शामिल फाइनेंसरों, खरीदारों, बिचौलियों और पैसे के लेन-देन से जुड़ी कड़ियों की पहचान करने में जुटी है।
DRI ने हाल ही में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सोना तस्करी नेटवर्क का खुलासा किया था। एजेंसी के मुताबिक यह सिंडिकेट इस साल करीब 318 किलोग्राम सोने की तस्करी में शामिल रहा है। इस सोने की अनुमानित कीमत करीब 475 करोड़ रुपये बताई गई है। इतने बड़े पैमाने पर हुई तस्करी के बाद एजेंसी ने नेटवर्क से जुड़े लोगों के बैंकिंग और गैर-बैंकिंग लेन-देन की जांच शुरू कर दी है।
जांच में यह सामने आया है कि तस्करी का नेटवर्क केवल सोना लाने वाले लोगों तक सीमित नहीं था। इसके पीछे कथित तौर पर एक लंबी चेन काम कर रही थी, जिसमें सोना उपलब्ध कराने वाले सप्लायर, उसे भारत तक पहुंचाने वाले कैरियर, स्थानीय स्तर पर डिलीवरी लेने वाले लोग, खरीदार और भुगतान को घुमाने वाले हवाला ऑपरेटर शामिल थे।
अब तक इस सिंडिकेट से जुड़े 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एजेंसी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ-साथ उनके मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक खातों और संपर्कों की जांच कर रही है। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि तस्करी किए गए सोने की बिक्री से कितनी रकम कमाई गई और उस पैसे को किस तरीके से अलग-अलग लोगों तक पहुंचाया गया।
DRI का फोकस खास तौर पर हवाला नेटवर्क पर है। आशंका है कि अवैध सोना बेचने के बाद बड़ी मात्रा में नकदी का इस्तेमाल किया गया और फिर इस रकम को पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से बाहर हवाला के जरिए एक जगह से दूसरी जगह भेजा गया। ऐसे मामलों में लेन-देन का कोई सीधा बैंक रिकॉर्ड नहीं होता, जिससे जांच एजेंसियों के लिए पैसे के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थियों का पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
एजेंसी अब उन लोगों की भी पहचान कर रही है जिन्होंने कथित तौर पर इस सोने की खरीद की थी। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि तस्करी का सोना किन बाजारों तक पहुंचा, उसे किस भाव पर बेचा गया और बिक्री के बाद मिली रकम किसके पास गई।
सोने की तस्करी के मामलों में आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू कीमतों के अंतर, सीमा शुल्क से बचने और अवैध कारोबार से अधिक मुनाफा कमाने के लिए नेटवर्क सक्रिय रहते हैं। ऐसे सिंडिकेट कई स्तरों पर काम करते हैं और हर व्यक्ति की भूमिका अलग होती है। कुछ लोग केवल कैरियर का काम करते हैं, जबकि कुछ नेटवर्क के वित्तीय संचालन को संभालते हैं।
इस मामले में एजेंसी यह भी जांच रही है कि क्या तस्करी के लिए हवाई मार्ग, समुद्री मार्ग या अन्य रास्तों का इस्तेमाल किया गया था। सोना किस देश से लाया गया, भारत में किस स्थान पर पहुंचा और वहां से किन शहरों तक भेजा गया, इन सभी पहलुओं को जांच में शामिल किया गया है।
DRI अधिकारियों का मानना है कि 318 किलोग्राम सोने की तस्करी अकेले कुछ लोगों के जरिए संभव नहीं हो सकती। इसी कारण एजेंसी पूरे नेटवर्क की संरचना को समझने पर जोर दे रही है। गिरफ्तार किए गए 11 लोगों से मिली जानकारी के आधार पर अन्य संदिग्धों और संभावित फाइनेंसरों की पहचान की जा रही है।
पैसे के लेन-देन की जांच में एजेंसी उन खातों और व्यक्तियों पर भी नजर रख रही है जिनके जरिए तस्करी से जुड़ी रकम का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। कई मामलों में हवाला के अलावा नकद भुगतान और फर्जी कारोबार के जरिए भी पैसे को वैध दिखाने की कोशिश की जाती है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस सिंडिकेट में भी ऐसा कोई तरीका अपनाया गया था।
DRI की जांच में यह भी देखा जा रहा है कि तस्करी किए गए सोने को पिघलाकर या उसका स्वरूप बदलकर बाजार में उतारा गया था या नहीं। ऐसा करने से उसकी मूल पहचान और स्रोत को छिपाना आसान हो सकता है। स्थानीय ज्वेलर्स, कारोबारियों या अन्य खरीदारों की संभावित भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
जांच एजेंसी को शक है कि इस सिंडिकेट का संचालन कई शहरों से किया जा रहा था। इसलिए अलग-अलग स्थानों पर मौजूद संदिग्ध संपर्कों और लेन-देन की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। जरूरत पड़ने पर अन्य जांच एजेंसियों और वित्तीय खुफिया इकाइयों से भी जानकारी साझा की जा सकती है।
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ सीमा शुल्क कानून और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। फिलहाल एजेंसी की प्राथमिकता नेटवर्क के उन लोगों तक पहुंचना है जो पर्दे के पीछे से वित्तीय व्यवस्था संभाल रहे थे।
DRI के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि करीब 475 करोड़ रुपये कीमत के तस्करी वाले सोने की बिक्री से पैदा हुई रकम का अंतिम लाभ किसे मिला। इसके लिए हवाला चैनलों, फाइनेंसरों और खरीदारों के बीच हुए लेन-देन की कड़ी जोड़ी जा रही है।
फिलहाल 11 गिरफ्तारियों के बाद भी जांच खत्म नहीं हुई है। एजेंसी का मानना है कि इस पूरे सिंडिकेट में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और गिरफ्तारियां तथा छापेमारी संभव है। DRI अब सोना तस्करी की सप्लाई चेन के साथ-साथ उसके वित्तीय नेटवर्क को भी पूरी तरह सामने लाने की कोशिश कर रही है।