कर्तव्य पथ पर नए भारत की तस्वीर, राज्यों की झांकियों ने लगाए चार चांद
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Republic Day 2025: कर्तव्य पथ पर उत्तर प्रदेश की झांकी भी नजर आई. झांकी में बहुत समीचीन और अध्यात्म से जुड़े विषय ‘महाकुंभ 2025-स्वर्णिम भारतः विरासत और विकास' की भव्यता प्रदर्शित की गई, जिसे विश्व स्तर पर 'मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' में मान्यता प्राप्त है. वर्चुअल महाकुंभ में प्रतिभागिता जैसी अनुभूति भी हो रही है. यह विस्मयकारी महाकुंभ पवित्र गंगा, निर्बाध यमुना और प्रयागराज में पौराणिक सरस्वती के संगम पर आयोजित महाकुंभ की उदात्तता को प्रकाशित करता है. सबसे पहले आगे की ओर झुकी अमृत कलश की एक प्रभावशाली प्रतिकृति है और पवित्र अमृतधारा के प्रवाह का प्रतीक है. इसके चारों ओर, साधुओं और संतों को शंख बजाते, ‘आचमन' करते हुए और साधना लीन (ध्यान) दिखाया गया है, जबकि भक्त महाकुंभ के आध्यात्मिक सार को आत्मसात् करते हुए संगम के पवित्र जल में स्नान करते हैं.
झांकी के पार्श्व में, अखाड़ों और अमृत (शाही) स्नान के लिए तैयार भक्तों को भित्ति चित्रों और एलईडी स्क्रीन के माध्यम से दर्शाया गया है. मूल में, समुद्र मंथन की पौराणिक गाथा हमें महाकुंभ के गहन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के विषय में जानकारी देने का प्रयास है. महाकुंभ 2025 के लिए सशक्त तकनीकी और डिजिटल तैयारियों को उद्घाटित करती यह झांकी चाक-चौबंद सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के अत्याधुनिक एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) को प्रदर्शित कर रही है. महाकुंभ के अवसर पर स्नान के लिए जा रहे अखाड़ों का सीधा प्रसारण, हमें भी कर्तव्य पथ पर प्रयागराज की पावन भूमि और संगम की मंत्रमुग्ध करने वाली अनुभूति प्रदान कर रहा है.
गणतंत्र दिवस की परेड में देश के अलग-अलग इलाकों से झांकियां आई हुई हैं और अपने करतब दिखा रही हैं. इसी क्रम में जनजातीय कार्य मंत्रालय की झांकी ने कर्त्तव्य पथ पर मार्च किया.
इंडियन एयरफोर्स की टुकड़ी ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया. वायुसेना बैंड, 3 मिग-29 और भारतीय वायुसेना की मार्चिंग टुकड़ी ने मार्च पास्ट किया.
भारतीय वायु सेना हमारे आसमान की सुरक्षा की अपनी प्राथमिक भूमिका से आगे बढ़ा रही है. यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संकट और आपदा के समय आशा की किरण के रूप में उभरी है. मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान (एचएडीआर) मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों (एचएडीआर) में भारतीय वायु सेना लगातार सबसे आगे रही है और राष्ट्रीय सीमाओं से भी आगे अपनी पहुंच का विस्तार किया है. चाहे वह तमिलनाडु और उत्तराखंड में जंगल की आग के दौरान राज्य सरकारों की सहायता हो, चक्रवात, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करना हो या आकस्मिक निकासी अभियान चलाना हो, भारतीय वायुसेना जरूरत के समय में एक जीवन रेखा रही है.