भारत: नीट पेपर लीक विवाद और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा तेज कर दिया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी विपक्ष का कहना है कि मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। विपक्ष अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग कर रहा है और छात्रों पर हुई कथित पुलिस बर्बरता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठा रहा है।
विपक्षी दलों की रणनीति को लेकर सोमवार को इंडिया गठबंधन के नेताओं की अहम बैठक होने वाली है। यह बैठक राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के चैंबर में होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। बैठक में नीट पेपर लीक, छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई और संसद में पेश होने वाले पेपर लीक विरोधी कानून पर विपक्ष का रुख तय किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, विपक्ष संसद में सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। विपक्ष का कहना है कि केवल शिक्षा मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के साथ न्याय के लिए सरकार को जवाब देना होगा। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल प्रधानमंत्री मोदी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग कर रहे हैं।
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को लोकतंत्र का हिस्सा बताते हुए कहा कि छात्रों की शिकायतों को बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए। राहुल गांधी ने यह भी सवाल किया कि क्या प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन जैसे बल प्रयोग की अनुमति दी गई थी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा छात्रों की जीत है, लेकिन अब प्रधानमंत्री को भी आगे आकर छात्रों से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठी, डंडे और अन्य बलों का इस्तेमाल किया गया, जिसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
वहीं, सरकार संसद में पेपर लीक रोकने के लिए नया कानून लाने की तैयारी कर रही है। 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' को लोकसभा में पेश करने की तैयारी है। इस बिल का उद्देश्य परीक्षा में होने वाली धांधली, पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है।
प्रस्तावित कानून में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। इसके तहत दोषी पाए जाने वालों को 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं संगठित तरीके से परीक्षा में धोखाधड़ी करने वालों के लिए कम से कम 7 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया जा सकता है।
हालांकि विपक्ष इस कानून को लेकर भी अपना रुख तय करेगा। विपक्षी दलों का कहना है कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करना जरूरी है।
नीट विवाद को लेकर संसद में आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। विपक्ष जहां छात्रों के मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बना रहा है, वहीं सरकार परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दे रही है। अब सबकी नजर संसद में होने वाली बहस और विपक्ष की आगामी रणनीति पर है।