मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आतंकवादी खतरों से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए गुरुवार, 5 नवंबर को बड़े स्तर पर आतंकवाद रोधी मॉक ड्रिल आयोजित की गई। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG), मुंबई पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त रूप से इस अभ्यास में हिस्सा लिया। इस दौरान ओएनजीसी, भारत डायमंड बोर्स, मुंबई के दोनों हवाई अड्डों, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और हाजी अली समेत 12 महत्वपूर्ण स्थानों को अभ्यास में शामिल किया गया।
यह सुरक्षा अभ्यास 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों की बरसी से पहले आयोजित किया गया। इसका प्रमुख उद्देश्य किसी संभावित आतंकी हमले की स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता, आपसी समन्वय और जवाबी कार्रवाई की क्षमता का आकलन करना था।
अभ्यास के दौरान एनएसजी कमांडो ने हेलीकॉप्टर की सहायता से ऊंची इमारतों पर उतरने का प्रदर्शन किया। इसके अलावा आतंकवादियों से मुकाबला करने, बंधकों को सुरक्षित छुड़ाने और आपात स्थिति में तेजी से सुरक्षा बलों की तैनाती जैसी गतिविधियों का अभ्यास किया गया।
मुंबई पुलिस की क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के जवानों ने भी अभियान में भाग लिया। अभ्यास के जरिए यह जांचा गया कि किसी बड़े खतरे की सूचना मिलने पर अलग-अलग एजेंसियां कितनी तेजी से संयुक्त कार्रवाई कर सकती हैं।
इस सुरक्षा अभ्यास का संबंध केंद्र सरकार की राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी नीति 'प्रहार' (PRAHAAR) के उद्देश्यों से भी है। इस नीति में खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और केंद्रीय एवं राज्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया है।
मुंबई में हवाई अड्डों, प्रमुख आर्थिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा विशेष महत्व रखती है। ऐसे में संयुक्त मॉक ड्रिल के जरिए सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता परखने के साथ संभावित कमियों की पहचान करने का अवसर भी मिलता है।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के अभ्यास का उद्देश्य वास्तविक आपात स्थिति आने से पहले जवानों को अलग-अलग परिस्थितियों के लिए तैयार रखना है। इससे आतंकवादी खतरों के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलती है।
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