Delhi दिल्ली। भारत में कृषि निर्यात को बढ़ावा देने और वैश्विक व्यापार साझेदारी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से नीति आयोग ने भारतीय राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) द्वारा आयोजित ‘भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2025’ को आधिकारिक समर्थन देने की घोषणा की है। यह सम्मेलन नवंबर 2025 में आयोजित होगा, जिसमें देश-विदेश से चावल उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ, निर्यातक, नीति निर्माता और निवेशक शामिल होंगे। नीति आयोग का कहना है कि यह सम्मेलन भारत के चावल उद्योग की क्षमता को विश्व स्तर पर प्रदर्शित करने का एक बड़ा मंच साबित होगा। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि “भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है, और इस सम्मेलन के जरिए हम गुणवत्ता, स्थिरता और निर्यात नीति में नवाचार को बढ़ावा देना चाहते हैं।
भारतीय राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के अध्यक्ष ने नीति आयोग के इस समर्थन का स्वागत करते हुए कहा कि “यह कदम भारत के चावल निर्यातकों को नई दिशा देगा। सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और उद्योग जगत के नेताओं की भागीदारी से भारत की वैश्विक स्थिति और मजबूत होगी। इस आयोजन में FAO, APEDA, FICCI, और विभिन्न राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी रहेगी। सम्मेलन में चावल उत्पादन की आधुनिक तकनीक, जलवायु अनुकूल खेती, जैविक खेती, आपूर्ति श्रृंखला सुधार, और निर्यात बढ़ाने की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, सम्मेलन के दौरान “India Rice Excellence Awards” भी दिए जाएंगे, जिनके माध्यम से देश के उत्कृष्ट चावल उत्पादकों, निर्यातकों और नवाचारकर्ताओं को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा, व्यापारिक बैठकों के लिए विशेष B2B सत्र और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। नीति आयोग का यह समर्थन भारत की “Make in India” और “Vocal for Local” नीतियों को सशक्त बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मेलन न केवल भारत के कृषि निर्यात को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा, बल्कि छोटे और मध्यम किसानों के लिए नए अवसर भी पैदा करेगा।