New Delhi नई दिल्ली: भारत सरकार परमाणु दुर्घटनाओं की स्थिति में उपकरण आपूर्तिकर्ताओं की जिम्मेदारी सीमित करने के लिए 2010 के नागरिक परमाणु दायित्व कानून में संशोधन की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से अमेरिकी कंपनियों को आकर्षित करना है, जो अब तक असीमित जिम्मेदारी के जोखिम के कारण पीछे रही हैं।
ड्राफ्ट कानून के अनुसार, यदि कोई दुर्घटना होती है तो ऑपरेटर द्वारा आपूर्तिकर्ता से मुआवजा लेने का अधिकार अनुबंध मूल्य और अनुबंध में निर्धारित अवधि तक ही सीमित रहेगा। यह संशोधन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है, जहां सुरक्षा की जिम्मेदारी ऑपरेटर की होती है, न कि आपूर्तिकर्ता की।
सरकार को उम्मीद है कि यह बदलाव जुलाई में मानसून सत्र के दौरान संसद में पारित हो सकता है। इससे भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता को भी गति मिलने की संभावना है।