कानपुर: कानपुर के करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में अब सबसे बड़ा खुलासा सामने आया है. जिस बहू शालू को ससुर की मौत के बाद फूट-फूटकर रोते हुए देखा गया था, पुलिस की जांच में उसी पर हत्या की साजिश रचने का आरोप है. पुलिस ने शालू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और जांच में उसे इस हत्याकांड की मुख्य साजिशकर्ता यानी मास्टरमाइंड माना गया है.
शुरुआत में यह मामला एक ऐसे सनसनीखेज कत्ल का था, जिसमें एक बुजुर्ग दवा कारोबारी अपने ही घर में खून से लथपथ मिला. बेटा-बहू रात में पार्टी के लिए बाहर गए थे. उनके लौटने पर घर का दरवाजा खुला मिला और अंदर विनीत मिनोचा का शव पड़ा था. लेकिन जैसे-जैसे पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, आरोपियों से पूछताछ, अपार्टमेंट के गार्ड के बयान और दूसरे सुरागों को जोड़ना शुरू किया, कहानी घर के बाहर से निकलकर परिवार के भीतर पहुंच गई और फिर सामने आई एक ऐसी साजिश, जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया.
विनीत मिनोचा की हत्या के बाद जब उनका बेटा और बहू घर पहुंचे तो घर के अंदर का मंजर देखकर परिवार में चीख-पुकार मच गई. बहू शालू भी ससुर की मौत पर बुरी तरह रोती हुई नजर आईं. उनके रोने और सदमे के वीडियो सामने आए. उस वक्त कहानी यही थी कि परिवार ने अपना बुजुर्ग सदस्य खो दिया है और घर में घुसकर किसी ने बेरहमी से उनकी हत्या कर दी. लेकिन पुलिस ने भावनात्मक तस्वीरों से आगे बढ़कर जांच शुरू की. सीसीटीवी फुटेज खंगाली गई. फ्लैट में आने-जाने वालों की जानकारी जुटाई गई. गार्ड से पूछताछ हुई. पुराने नौकरों के बारे में पता लगाया गया. यहीं से पुलिस को पहला बड़ा सुराग मिला
सीसीटीवी में दो लोग फ्लैट में दाखिल होते दिखाई दिए थे. इनमें से एक की पहचान मृतक के पुराने नौकर विशाल के रूप में हुई. विशाल कभी विनीत मिनोचा के घर काम करता था, लेकिन रुपये चोरी करने के आरोप के बाद उसे करीब छह साल पहले नौकरी से निकाल दिया गया था. इसके बावजूद विशाल का परिवार से संपर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था. वह बेटे और बहू के संपर्क में बना रहा और कभी-कभी घर भी आता-जाता था. पुलिस के मुताबिक, इसी पुराने परिचय ने कथित साजिश को आसान बनाया. विशाल ने पूछताछ में कथित तौर पर बताया कि उसे घर के अंदर की जानकारी थी और फ्लैट में आने-जाने का तरीका भी मालूम था.
पुलिस जांच के मुताबिक शनिवार रात करीब 9:36 बजे सुब्रत, उनकी पत्नी शालू और उनका छह साल का बेटा घर से पार्टी के लिए निकले. परिवार के निकलने के करीब दस मिनट बाद दो लोग फ्लैट की तरफ आते दिखाई दिए. दोनों फ्लैट के अंदर दाखिल हुए और कारोबारी के लौटने का इंतजार करने लगे. यानी हत्यारे हमला करने के लिए मौके पर पहले से मौजूद थे.
पुलिस की जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी करीब सवा घंटे तक फ्लैट के अंदर छिपे रहे. उन्हें पता था कि विनीत मिनोचा बाहर हैं और कुछ देर बाद घर लौटेंगे. करीब 10:58 बजे विनीत मिनोचा घर लौटे. इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदला. दोनों हमलावरों ने करीब आधे घंटे के भीतर कारोबारी पर हमला किया और उनकी हत्या कर दी. पूरी वारदात का टाइमलाइन करीब 112 मिनट का बताया जा रहा है.
जांच में एक और अहम कड़ी सामने आई- फ्लैट की चाबी. पुलिस पूछताछ में विशाल ने कथित तौर पर बताया कि उसके पास फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी थी और इसी के जरिए वह अपने साथी के साथ अंदर दाखिल हुआ. इससे पुलिस को शक हुआ कि वारदात अचानक नहीं हुई थी बल्कि पहले से पूरी तैयारी की गई थी. पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद करने और आरोपियों के खून से सने कपड़े मिलने की भी बात कही है. दोनों आरोपी वारदात के बाद भागते समय पुलिस मुठभेड़ में पकड़े गए.
इस केस में शुरुआत से ही एक बात पुलिस को परेशान कर रही थी. अगर हत्या लूट के लिए हुई थी तो घर से पैसा, जेवर या दूसरी कीमती चीजें क्यों नहीं गायब थीं? विनीत मिनोचा बड़े दवा कारोबारी थे. वह करीब 45 वर्षों से दवा कारोबार से जुड़े थे और कानपुर के प्रमुख दवा कारोबारियों में गिने जाते थे. उनका कारोबार मजबूत था और परिवार आर्थिक रूप से संपन्न था. लेकिन पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, उसे शक हुआ कि हत्या का मकसद पैसा लूटना नहीं बल्कि परिवार के भीतर का विवाद और संपत्ति से जुड़ी लालसा हो सकता है.
पुलिस जांच में सामने आई कथित कहानी के मुताबिक, विनीत मिनोचा आर्थिक रूप से बेहद मजबूत थे, लेकिन बेटे और बहू के खर्च को लेकर उनका नियंत्रण था. आरोप है कि वह बेटे को सीमित पैसे देते थे और बहू की व्यक्तिगत गतिविधियों तथा खर्चों पर भी रोक-टोक रखते थे. परिवार के भीतर इसी बात को लेकर तनाव की स्थिति बनने की बात सामने आई है. पुलिस के सामने जो कथित वजह आई है, उसके मुताबिक बहू को लगता था कि करोड़ों की संपत्ति होने के बावजूद उसे और उसके पति को अपनी इच्छा के मुताबिक पैसा खर्च करने की स्वतंत्रता नहीं थी. इसी कथित नाराजगी ने धीरे-धीरे एक खतरनाक साजिश का रूप लिया.
जांच के मुताबिक हत्या के लिए ₹6 लाख की सुपारी तय किए जाने की बात सामने आई है. कथित तौर पर ₹2 लाख हत्या के बाद देने और बाकी ₹4 लाख करीब 15 दिन के भीतर देने की बात तय हुई थी. यानी पुलिस के अनुसार यह कोई अचानक हुआ झगड़ा या आवेश में किया गया हमला नहीं था, बल्कि पैसे देकर हत्या कराने की साजिश थी.
इस हत्याकांड का सबसे चौंकाने वाला पहलू हत्या का कथित शुरुआती प्लान है. पुलिस के सामने आए आरोपों के मुताबिक, शुरुआत में योजना यह थी कि विनीत मिनोचा को सोने के दौरान तकिए से दबाकर मार दिया जाए. मकसद यह दिखाना था कि उनकी मौत प्राकृतिक तरीके से हुई है या हार्ट अटैक से हुई है. अगर यह योजना सफल होती तो परिवार के लोगों पर तत्काल शक नहीं जाता और मौत को सामान्य बताकर मामला खत्म किया जा सकता था. लेकिन हालात योजना के मुताबिक नहीं चले.
यही वह मोड़ था जिसने कथित साजिश को पूरी तरह बदल दिया. हमलावरों के बारे में बताया गया है कि वे घर के अंदर छिपकर विनीत के सोने का इंतजार कर रहे थे. लेकिन विनीत उस रात अचानक बच्चों के कमरे की तरफ चले गए. कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला था. विनीत कमरे के अंदर पहुंचे तो वहां छिपे दोनों हमलावर उनके सामने आ गए. कमरे की लाइट जलते ही दोनों को लगा कि अब उनके पास हमला करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. इसके बाद चाकू से विनीत पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया गया.
हमले में विनीत मिनोचा गंभीर रूप से घायल हो गए. उनके गले और सीने समेत शरीर के कई हिस्सों पर चाकू के घाव मिले. अलग-अलग रिपोर्टों में घावों की संख्या अलग बताई गई है, लेकिन पुलिस जांच के मुताबिक हमला बेहद हिंसक था. कमरे में खून बिखरा हुआ था. हमलावरों ने हत्या के बाद कपड़े बदले और वहां से निकल गए.
पुलिस जांच में गार्ड की भूमिका भी अहम हो गई है. दिए विवरण के मुताबिक, पुलिस ने गार्ड से पूछताछ में यह पता लगाया कि उसे पहले से फोन करके बताया गया था कि एक व्यक्ति अपने दोस्त के साथ घर आएगा. कथित तौर पर गार्ड से कहा गया कि उसे अंदर आने दिया जाए, लेकिन रजिस्टर में एंट्री न की जाए. पुलिस अब इस बयान को सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल से जोड़कर देख रही है. अगर यह कड़ी जांच में पुष्ट होती है तो यह इस बात का बड़ा सबूत होगी कि हमलावरों के लिए अपार्टमेंट में प्रवेश की व्यवस्था पहले से की गई थी.
हत्या के बाद बहू शालू ने ससुर के लिए बेहद भावुक बातें कहीं. बताया गया कि वह पुलिस और परिवार के सामने कह रही थीं कि उनके ससुर बहुत अच्छे थे और उनसे बहुत प्यार करते थे. लेकिन पुलिस ने सिर्फ बयानों पर भरोसा नहीं किया. जांच अधिकारियों ने कथित तौर पर आरोपियों के बयानों, मोबाइल संपर्क, सीसीटीवी, प्रवेश की जानकारी और घटनाक्रम को आपस में मिलाना शुरू किया. इसके बाद बहू की भूमिका भी जांच के दायरे में आई.
पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि उन्हें यह काम करने के लिए बेटे-बहू की तरफ से कहा गया था. यहीं से पुलिस ने कथित साजिश की पूरी कड़ी जोड़नी शुरू की. हालांकि आरोपियों के बयान को भी अदालत में स्वतंत्र सबूत के रूप में साबित किया जाना बाकी है, लेकिन पुलिस ने अन्य साक्ष्यों के साथ इसे अपनी जांच का हिस्सा बनाया.
जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने शालू को भी आरोपी बनाया और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. पुलिस के अनुसार शालू पर हत्या की साजिश रचने और हमलावरों को कथित तौर पर हत्या के लिए तैयार करने का आरोप है. यानी जिस केस की शुरुआत एक बाहरी हमले के तौर पर हुई थी, वह अब घर के अंदर से रची गई कथित साजिश तक पहुंच चुका है.
इस कहानी का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है. जिस विशाल को कभी चोरी के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया था, वही बाद में विनीत मिनोचा के घर तक पहुंचा. पुलिस के मुताबिक, विशाल का परिवार से संपर्क बना रहा और इसी वजह से उसे घर की व्यवस्था और परिवार की दिनचर्या की जानकारी मिलती रही. जांच के अनुसार इसी जानकारी का इस्तेमाल हत्या की साजिश में किया गया. विशाल ने अपने पुराने साथी राजकिशोर को भी इस काम में शामिल किया. दोनों पहले भी आपराधिक मामलों में जेल जा चुके थे और पुलिस के अनुसार उनकी जान-पहचान पुरानी थी.
पुलिस की जांच के मुताबिक परिवार के पार्टी के लिए निकलने का समय ही हत्या की साजिश का सबसे अहम हिस्सा बना. बेटा-बहू और बच्चा घर से बाहर निकले. कुछ ही मिनट बाद दोनों हमलावर अंदर पहुंचे. उन्होंने काफी देर तक इंतजार किया. विनीत घर लौटे और कुछ ही देर बाद एक करोड़पति दवा कारोबारी अपने ही फ्लैट में मौत के घाट उतार दिया गया.
रात बीत चुकी थी. सुबह करीब चार बजे परिवार पार्टी से वापस लौटा. फ्लैट का दरवाजा खुला था. सुब्रत अंदर गए। इसके बाद घर के अंदर जो दिखाई दिया, उससे परिवार के होश उड़ गए. विनीत मिनोचा खून से लथपथ पड़े थे. कमरे में खून फैला था और उनके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे. इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई. फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए और सीसीटीवी की जांच शुरू हुई.
सीसीटीवी और दूसरे सुरागों के आधार पर पुलिस ने दोनों संदिग्धों की पहचान की. इसके बाद उनकी तलाश शुरू हुई. जवाहरपुरम के आसपास दोनों आरोपियों के पुलिस से मुठभेड़ की बात सामने आई. दोनों के पैरों में गोली लगी और उन्हें गिरफ्तार कर अस्पताल भेजा गया. पुलिस ने पूछताछ की तो हत्या की पूरी कहानी की कड़ियां सामने आने लगीं.
इस हत्याकांड में अब तीन नाम सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं. पहला- शालू, जिस पर पुलिस ने हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है. दूसरा- विशाल, मृतक का पूर्व नौकर, जिसने कथित तौर पर हत्या को अंजाम देने में भूमिका निभाई. तीसरा- राजकिशोर, जिसने विशाल के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देने का आरोप झेला है. पुलिस के मुताबिक इन तीनों के बीच की कड़ी ही इस पूरे हत्याकांड का सबसे अहम हिस्सा है.
इस केस की सबसे चौंकाने वाली तस्वीर शायद यही है. एक तरफ कैमरे में ससुर की मौत के बाद रोती-बिलखती बहू दिखाई देती है. दूसरी तरफ पुलिस की जांच उस महिला को कथित तौर पर हत्या की साजिश के केंद्र में खड़ा कर देती है. एक तरफ करोड़ों की संपत्ति वाला परिवार है. दूसरी तरफ सीमित खर्च और कथित पारिवारिक रोक-टोक को लेकर पैदा हुआ तनाव. और इन दोनों के बीच छह लाख रुपये की कथित सुपारी, पुराना नौकर, डुप्लीकेट चाबी और घर के अंदर करीब सवा घंटे तक छिपे हत्यारे.
अब इस पूरे मामले की अंतिम सच्चाई अदालत में सामने आएगी. लेकिन पुलिस की मौजूदा जांच ने यह जरूर साफ कर दिया है कि विनीत मिनोचा की हत्या की कहानी सिर्फ बाहर से आए दो हत्यारों की कहानी नहीं रह गई है- जांच का केंद्र अब परिवार के भीतर रची गई कथित साजिश बन चुका है.
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