वाराणसी एयर शो में बड़ी सुरक्षा चूक! सेना का फर्जी कैप्टन बनकर प्रतिबंधित हेलीपैड में घुसा युवक
प्रतिबंधित हेलीपैड क्षेत्र में घूम रहा था युवक
उत्तर प्रदेश। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री की मौजूदगी वाले वाराणसी एयर शो के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नमो घाट स्थित प्रतिबंधित हेलीपैड क्षेत्र में सेना का कैप्टन बनकर घूम रहे एक युवक को सुरक्षा एजेंसियों ने पकड़ लिया। आरोपी की पहचान आजमगढ़ निवासी अर्पित चतुर्वेदी के रूप में हुई है। पुलिस, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और वायुसेना के अधिकारियों की पूछताछ में उसके सेना का अधिकारी होने के दावे की पोल खुल गई। मामले में आदमपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।
प्रतिबंधित हेलीपैड क्षेत्र में घूम रहा था युवक
मिली जानकारी के अनुसार, वाराणसी के नमो घाट पर आयोजित एयर शो के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम को देखते हुए हेलीपैड और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में आम लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध था। इसी बीच एक युवक खुद को भारतीय सेना का कैप्टन बताते हुए प्रतिबंधित क्षेत्र में घूमता दिखाई दिया। उसकी गतिविधियों और पहचान को लेकर संदेह होने पर सुरक्षा अधिकारियों ने उससे पूछताछ शुरू की।
पुलिस, IB और एयरफोर्स ने की पूछताछ
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के साथ इंटेलिजेंस ब्यूरो और भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने भी युवक से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान वह सेना में कैप्टन होने के अपने दावे की पुष्टि नहीं कर सका। इसके बाद उसकी पहचान आजमगढ़ निवासी अर्पित चतुर्वेदी के रूप में सामने आई। आरोप है कि युवक सेना का अधिकारी बनकर प्रतिबंधित क्षेत्र में मौजूद था।
आदमपुर थाने में दर्ज हुई FIR
घटना सामने आने के बाद आरोपी के खिलाफ वाराणसी के आदमपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि आरोपी प्रतिबंधित क्षेत्र तक कैसे पहुंचा, उसने सेना का अधिकारी होने का दावा क्यों किया और क्या उसके पास कोई फर्जी पहचान पत्र या अन्य दस्तावेज थे।
पीएम मोदी की मौजूदगी वाले कार्यक्रम में सुरक्षा पर सवाल
बताया गया है कि एयर शो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री भी शामिल हुए थे। ऐसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान किसी अनधिकृत व्यक्ति का प्रतिबंधित हेलीपैड क्षेत्र में पहुंचना सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े करता है। फिलहाल आरोपी की मंशा और प्रतिबंधित क्षेत्र में उसके प्रवेश की परिस्थितियों को लेकर जांच के निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं। सुरक्षा एजेंसियों की जांच से ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।