बालाघाट में नक्सलियों का बड़ा सरेंडर, 10 नक्सली CM के सामने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे

बड़ी खबर

Update: 2025-12-07 13:30 GMT
Balaghat. बालाघाट। बालाघाट जिले में नक्सल इतिहास में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटना हुई है। पहली बार 10 नक्सलियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने अपने हथियार सौंपकर आत्मसमर्पण किया। इनमें 62 लाख रुपए के इनामी हार्डकोर नक्सली सुरेंद्र उर्फ कबीर भी शामिल हैं। इस समूह के सभी 10 नक्सलियों पर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में कुल 2 करोड़ 36 लाख रुपए का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में चार महिला और छह पुरुष शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि बालाघाट जोन में इस साल अब तक 10 हार्डकोर नक्सली मारे जा चुके हैं। उन्होंने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आश्वस्त किया कि उनका पुनर्वास किया जाएगा और उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रक्रिया राज्य की नक्सल आत्मसमर्पण नीति और सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों का परिणाम है।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने पुलिस को दो AK-47, दो इंसास रायफल, एक एसएलआर, दो एसएसआर, सात बीजीएल सेल और चार वॉकी-टॉकी सौंपे। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मार्च 2026 तक नक्सलियों के खात्मे की समय-सीमा और जंगलों में बढ़ते सुरक्षा बलों के दबाव के कारण नक्सलियों ने हिंसा छोड़कर बातचीत और आत्मसमर्पण का निर्णय लिया। यह घटना लांजी के छत्तीसगढ़ सीमा से लगे माहिरखुदरा क्षेत्र में हुई मुठभेड़ के बाद शनिवार देर रात को सम्पन्न हुई। वनकर्मी गुलाब उईके और स्थानीय ग्रामीणों ने इस आत्मसमर्पण प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई। वनकर्मी ने बताया कि नक्सलियों ने खुद ही संपर्क किया और वाहन के माध्यम से बालाघाट लाए गए। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों का सहयोग न मिलने और सुरक्षा बलों की सतत् निगरानी के कारण नक्सलियों ने आत्मसमर्पण को प्राथमिकता दी।
इस ऐतिहासिक आत्मसमर्पण को राज्य और जिले के लिए एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। नक्सली गतिविधियों के विरुद्ध सुरक्षा बलों की लगातार गश्त, मोर्चाबंदी और सटीक रणनीति ने नक्सलियों के मनोबल को प्रभावित किया। अधिकारीयों ने बताया कि नक्सलियों का यह आत्मसमर्पण यह संकेत है कि नक्सल हिंसा धीरे-धीरे घट रही है और सुरक्षा बलों के प्रयास प्रभावी साबित हो रहे हैं। सरेंडर प्रक्रिया के दौरान पुलिस और वनकर्मियों ने नक्सलियों के साथ मानवीय और सुरक्षित व्यवहार किया। उन्हें आश्वासन दिया गया कि उनका पुनर्वास किया जाएगा और उनके लिए रोजगार एवं शिक्षा संबंधी अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। अधिकारियों ने कहा कि यह कदम न केवल बालाघाट जिले में शांति स्थापित करेगा, बल्कि अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी सकारात्मक संदेश देगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना राज्य की नक्सल आत्मसमर्पण नीति और जनभागीदारी की सफलता को दर्शाती है। स्थानीय ग्रामीणों और वनकर्मियों के सहयोग के बिना नक्सलियों का आत्मसमर्पण इतना सहज और सुरक्षित ढंग से संभव नहीं हो पाता। यह पहल जिले में सामाजिक सामंजस्य और सुरक्षा के प्रति नागरिकों की जिम्मेदारी का भी उदाहरण है। इस ऐतिहासिक घटना से यह भी स्पष्ट हो गया है कि राज्य सरकार की नक्सल विरोधी रणनीति, सुरक्षा बलों की सक्रियता और मुख्यधारा में लौटने के अवसर नक्सलियों को हिंसा छोड़ने और समाज के सामान्य जीवन में लौटने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
Tags:    

Similar News