Shimla शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने लोक सेवा आयोग की चयन प्रक्रिया में किए गए बदलावों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आयोग की व्यवस्था में परिवर्तन करते हुए चयन प्रक्रिया को अधिक संतुलित बनाने का प्रयास किया है। अब अंतिम चयन में लिखित परीक्षा के साथ व्यक्तिगत साक्षात्कार में मिले अंकों को भी शामिल किया जाता है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि उनका मानना है कि सरकार ने लोक सेवा आयोग की व्यवस्था को बदलने का काम किया है। उन्होंने पुरानी व्यवस्था का उदाहरण देते हुए बताया कि पहले यदि 100 पदों के लिए भर्ती निकाली जाती थी तो लिखित परीक्षा में सबसे ज्यादा अंक हासिल करने वाले उम्मीदवार के अंकों को अंतिम चयन में उस तरह महत्व नहीं मिलता था, जैसा मिलना चाहिए था।
सीएम सुक्खू के मुताबिक पहले चयन में वाइवा यानी साक्षात्कार के अंकों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती थी। उन्होंने दावा किया कि 30 अंकों के साक्षात्कार में ज्यादा अंक हासिल करने वाला उम्मीदवार चयन में आगे निकल सकता था, जबकि लिखित परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले अभ्यर्थी को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने इस पूरी व्यवस्था में सुधार किया है। नई व्यवस्था के तहत लिखित परीक्षा और व्यक्तिगत साक्षात्कार दोनों में उम्मीदवार द्वारा हासिल किए गए अंकों को अंतिम चयन के दौरान जोड़ा जाता है। इससे अभ्यर्थी के लिखित परीक्षा के प्रदर्शन को भी उचित महत्व मिलता है।
सुक्खू ने इसे भर्ती व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार बताते हुए कहा कि लोक सेवा आयोग की चयन प्रणाली को बदलने का उद्देश्य उम्मीदवारों के प्रदर्शन का समग्र मूल्यांकन सुनिश्चित करना है। लिखित परीक्षा में मेहनत करके बेहतर अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों के प्रदर्शन को अंतिम मेरिट तैयार करते समय नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री का यह बयान सरकारी भर्ती प्रक्रिया और लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने पुरानी चयन प्रणाली में बदलाव करते हुए ऐसी व्यवस्था लागू की है जिसमें लिखित परीक्षा और इंटरव्यू दोनों का प्रदर्शन अंतिम चयन का आधार बनता है।
Tags: