BPSC TRE-3 पेपर लीक केस में बड़ी कार्रवाई, डॉक्टर गिरफ्तार

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Update: 2026-07-28 11:01 GMT
Bihar. बिहार। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-3 पेपर लीक मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को बड़ी सफलता मिली है। जांच एजेंसी ने इस मामले में एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि डॉक्टर पेपर लीक कराने वाले नेटवर्क का हिस्सा था और पैसे लेकर अभ्यर्थियों तक लीक प्रश्नपत्र पहुंचाने में मदद कर रहा था। इस गिरफ्तारी के साथ ही TRE-3 पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 296 हो गई है।
आर्थिक अपराध इकाई की ओर से मंगलवार को जारी बयान में डॉक्टर की गिरफ्तारी की पुष्टि की गई। एजेंसी के मुताबिक, गिरफ्तार डॉक्टर बिहार के जहानाबाद जिले का रहने वाला है। उसे सोमवार को पूछताछ के दौरान हिरासत में लिया गया था। जांच में सामने आए तथ्यों और उसकी भूमिका के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई की गई। EOU के अनुसार, गिरफ्तार डॉक्टर का संबंध संजीव कुमार सिंह उर्फ संजीव मुखिया के बेटे से था। संजीव मुखिया को NEET UG-2024 पेपर लीक मामले का कथित मुख्य आरोपी बताया जाता है। NEET पेपर लीक मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। आर्थिक अपराध इकाई का कहना है कि संजीव मुखिया कई अन्य मामलों में भी वांछित रहा है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, डॉक्टर TRE-3 शिक्षक भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक कराने की साजिश में शामिल था। आरोप है कि वह पैसे लेकर ऐसे अभ्यर्थियों को इस नेटवर्क से जोड़ता था, जिन्हें परीक्षा से पहले लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए अभ्यर्थियों को परीक्षा में सफलता दिलाने की कोशिश की जाती थी। आर्थिक अपराध इकाई ने बताया कि जांच के दौरान यह बात सामने आई कि डॉक्टर को प्रत्येक अभ्यर्थी के बदले 50 हजार रुपये देने का वादा किया गया था। वह जितने अधिक अभ्यर्थियों को इस पेपर लीक नेटवर्क से जोड़ता, उसे उसी हिसाब से भुगतान किया जाना था। जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी हुई है।
EOU के अनुसार, BPSC TRE-3 परीक्षा 15 मार्च 2024 को आयोजित होनी थी। परीक्षा से दो से तीन दिन पहले डॉक्टर करीब 30 अभ्यर्थियों को पटना से झारखंड के हजारीबाग लेकर गया था। आरोप है कि हजारीबाग के एक होटल में इन अभ्यर्थियों को परीक्षा का लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था। जांच एजेंसी का कहना है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराना इस पूरी साजिश का अहम हिस्सा था। अभ्यर्थियों को पहले से प्रश्नपत्र और उसके उत्तर उपलब्ध कराकर परीक्षा में फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। मामले की जांच में अब तक कई लोगों की भूमिका सामने आ चुकी है।
बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से TRE-3 परीक्षा प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती के लिए आयोजित की गई थी। परीक्षा से पहले पेपर लीक की जानकारी सामने आने के बाद आर्थिक अपराध इकाई ने इसकी जांच शुरू की थी। जांच आगे बढ़ने के साथ ही कई आरोपियों के नाम सामने आए और लगातार गिरफ्तारियां की गईं। गिरफ्तार डॉक्टर की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी जांच के दौरान सामने आई है। आर्थिक अपराध इकाई के मुताबिक, डॉक्टर ने वर्ष 2021 में पटना स्थित नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से MBBS की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उसने कैमूर जिले में सरकारी डॉक्टर के रूप में भी सेवाएं दी थीं।
बाद में डॉक्टर ने सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। वर्तमान समय में वह मेडिकल क्षेत्र में आगे की पढ़ाई यानी स्नातकोत्तर की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान उसका नाम TRE-3 पेपर लीक मामले की जांच में सामने आया और पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आर्थिक अपराध इकाई अब पेपर लीक नेटवर्क की पूरी कड़ी को जोड़ने में जुटी हुई है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्रश्नपत्र लीक करने, उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और अभ्यर्थियों से संपर्क कराने में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
एजेंसी का मानना है कि इस मामले में एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था, जिसमें अलग-अलग स्तर पर कई लोगों की भूमिका हो सकती है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे भी नए नाम सामने आने की संभावना है। TRE-3 पेपर लीक मामला बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर चुका है। सरकार और जांच एजेंसियां लगातार ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की बात कह रही हैं। आर्थिक अपराध इकाई का कहना है कि जांच अभी जारी है और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। डॉक्टर की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसी उसकी भूमिका, संपर्कों और आर्थिक लेनदेन की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पेपर लीक मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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