जम्मू-कश्मीर में विवादित किताबों पर बड़ा एक्शन, LG ने 8 अधिकारियों को किया निलंबित
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Jammu and Kashmir. जम्मू-कश्मीर। जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में रखी गई विवादित किताबों को लेकर बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 8 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही एक संविदा कर्मचारी की सेवा भी समाप्त कर दी गई है और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं। जानकारी के अनुसार, यह विवाद समग्र शिक्षा लाइब्रेरी ग्रांट के तहत सरकारी स्कूलों के लिए खरीदी गई किताबों से जुड़ा है। इस योजना के तहत 1,832 सरकारी स्कूलों और 394 पीएम श्री स्कूलों की लाइब्रेरी के लिए उम्र के अनुसार किताबों की खरीद की गई थी। इसके लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया गया था और चयन प्रक्रिया के लिए विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की चार अलग-अलग समितियां बनाई गई थीं।
इन समितियों द्वारा 364 प्रकाशकों की ओर से प्राप्त 463 पुस्तकों का चयन किया गया था। बाद में जांच के दौरान यह सामने आया कि इनमें से दो पुस्तकों में कथित रूप से आपत्तिजनक और विवादित सामग्री शामिल थी, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया। विवादित पुस्तकों में “Personalities and Legends of J&K” और “Great Personalities of Jammu and Kashmir” शामिल हैं। इन पुस्तकों के विभिन्न स्कूलों में वितरण की पुष्टि भी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, पहली पुस्तक की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन और उधमपुर के स्कूलों में भेजी गई थीं, जबकि दूसरी पुस्तक की 128 प्रतियां जम्मू और बारामूला के स्कूलों में पहुंच चुकी थीं।
मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने 3 जुलाई 2026 को दोनों पुस्तकों को तत्काल प्रभाव से वापस लेने के आदेश जारी किए। जांच में यह भी माना गया कि चयन और सिफारिश प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों द्वारा गंभीर लापरवाही बरती गई। इसी आधार पर शिक्षा विभाग, समग्र शिक्षा, एससीईआरटी और स्कूल स्तर के कुल 8 अधिकारियों को निलंबित किया गया है। इसके अलावा एक कंप्यूटर सहायक की संविदा सेवा भी समाप्त कर दी गई है। सरकार ने इस पूरे मामले की जांच अतिरिक्त मुख्य सचिव (आईएएस) अश्विनी कुमार को सौंपी है, जबकि सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त सचिव को प्रस्तुत अधिकारी बनाया गया है। जांच रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर सरकार को सौंपनी होगी।
इसके साथ ही सरकार ने संबंधित लेखकों और प्रकाशकों को जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में ब्लैकलिस्ट और प्रतिबंधित करने का भी निर्णय लिया है। वहीं इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि पुस्तकों में आतंकवाद और अलगाववाद से जुड़े व्यक्तियों को “महान हस्तियों” के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने इस पूरे मामले को गंभीर प्रशासनिक चूक बताते हुए शिक्षा विभाग, विशेषज्ञ समितियों और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। सरकार का कहना है कि बच्चों की शिक्षा सामग्री में किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।