नामांतरण के नाम पर अब नया कमाल, शहरी क्षेत्र में अवैध कालोनी अपने आप हो रही वैध
कचना, खम्हारडीह मास्टर प्लान में आवासीय होने के कारण अनाप शनाप प्लाटों के रेट बढ़े
गोकुल नगर, संजय नगर चौरसिया
कालोनी के इलाकों में भी बड़ी मात्रा में रजिस्ट्री और खरीदी बिक्री
छेरीखेड़ी, धरमपुरा और लाभांडी क्षेत्र में आवासी क्षेत्रों में अवैध कालोनियों का जाल बिछा
टाटीबंध-सरोना, भाटागांव, सुंदर नगर
रिंग रोड क्षेत्र में अवैध कमर्शियल प्लाटों के दाम बेहताशा बढ़ोत्तरी
मोवा, कापा, सड्डू, विधानसभा क्षेत्र
में भी आवासीय प्लाट में अवैध आवासीय कालोनियां बनाई गई
रायपुर (जसेरि) । सरकार के कानून कायदे कितने भी सख्त हो लेकिन भू-माफिया कोई न कोई शार्टकट रास्ता निकाल ही लेते है। प्रदेश में मई माह से प्रारंभ हुए आटोमेटिक नामांतरण सिस्टम ने जहां आम जनता को राहत प्रदान की, वहीं भूमाफिया ने इसे कमाई का जरिया बना लिा है। पिछले तीन माह में 24 हजार से अधिक नामांतरण दर्ज किए गए। जिसमें बड़ी संख्या में अवैध प्लाट शामिल है। इस प्रक्रिया में तहसीलदार, और पटवािरयों की भूमिका समाप्त हो गई है। जिससे जांच परख की प्रकिरया कमजोर पड़ गई है। भूमाफिया ने इसी का फायदा उटाते हुए अवैध कालोनियों की खरीदी -बिक्री को तेज कर दिया है।थ कई कालोमाइीजरों ने बिना टीएनसी की मंजरी और नक्शा पास कराए ही कालोनी काट रहे है। इन प्रोजेक्टों की न तो जांच हो रही है न ही कोई कार्रवाई हो रही है। जिससे सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। भूमाफिया ने इसी का फायदा उठा कर अवैध कालोनी की खरीदी -बिक्री धड़ाधड़ कर रहे है। धड़ाधड़ हुए डायर्वसन के बीच सरकार ने 20 जुलाई से 2200 वर्गफीट से कम के प्लाट की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी है। लेकिन भूमाफिया पहले से ही सतर्क थे। उन्हें इस संबावित रोक की जानकारी पहले ही मिल गई थी, जिसके कारण महज तीन महीनों में 25 हजार से अधिक डायर्वसन प्रकरण निपटा लिए गए। अब जब डायर्वसन और छोटी रजिस्ट्री पर रोक लगी है, तो माफिया इन्ही पुराने प्लाटों को ऊंचे दाम पर बेच कर मालामाल हो रहे है। राजधानी सहित प्रदेश के कई शहरों में 500 से अधिक एसे कार्यालय चल रहे जहां निजी स्तर पर जमीन की खरीदी बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। इस संबंध में कलेक्टर गौरव सिंह ने कहा कि अवैध प्लाटिंग को रोकने के लिए सरकार ने चोटे प्लाटों की खरीदी -बिक्री पर रोक लगा दी है। जहां भी अवैध निर्माण की सूचनाएं मिल रही है उन पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
प्रशासनिक स्तर पर खामोशी : प्रशासनिक चुप्पी भी सवालों के घेरे में है, जिन बिल्डरों ने बिना अनुमित कालोनी काटी है उनके खिलाफ केवल कुछ क्षेत्रों में कार्रवाई हुई है, अधिकांश जगहों पर मापिया के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जिसमें प्रशासनिक मशीनरी की निगरानी की कमी नजर आ रही है।
कचना, खम्हारडीह, संतोषी नगर, गोकुलनगर , खनिज नगर, महावीर नगर मोवा, कापा, सड्डू, गुढिय़ारी पड़ाव, गोगांव, सेजबहार, संजय नगर, भाटागांव, शिवानंद नगर, टाटीबंध, सरोना, लाभांडी, अग्रसेन धाम, धरमपुरा, माना, टेमरी, टिकरापारा, सुंदर नगर के सभी क्षेत्र में अवैध टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से बिना लेआउट पास कराए बिल्डर मनमानी कर रहे, छोटे भूखंडों का विक्रय करा रहे। शासन को करोड़ों का राजस्व हानि अवैध भू-माफियाओं के द्वारा प्रतिमाह किया जा रहा है। भू-माफिया हो रहे माला-माल।