स्कूल ड्यूटी में लौटे पूर्व सांसद, बीजेपी में नहीं मिला रहा था तवज्जो

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Update: 2026-08-03 01:54 GMT

त्रिपुरा। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद रेबती त्रिपुरा ने राजनीति से दूरी बनाते हुए अपने पुराने पेशे शिक्षण के क्षेत्र में वापसी कर ली है। स्कूल शिक्षक से भाजपा सांसद और अब फिर शिक्षक बने रेबती त्रिपुरा का कहना है कि अपने पुराने पेशे में लौटकर उन्हें न केवल उद्देश्य मिला है, बल्कि राजनीतिक जीवन में आए अचानक ठहराव के बाद भविष्य की आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

त्रिपुरा के धलाई जिले के एक सुदूर गांव के निवासी रेबती त्रिपुरा ने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर करने के बाद वर्ष 2001 में अगरतला के महात्मा गांधी मेमोरियल स्कूल में शिक्षक के रूप में नौकरी शुरू की थी। हालांकि, उनके मन में राजनीति में आने की इच्छा भी थी। वर्ष 2014 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के साथ उन्हें मौका मिला। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें पूर्वी त्रिपुरा संसदीय सीट से उम्मीदवार बनाया और वह चुनाव जीतकर सांसद बने।

शिक्षक से नेता बने रेबती त्रिपुरा को पिछले लोकसभा चुनाव में झटका लगा, जब भाजपा ने इस सीट से त्रिपुरा राजपरिवार की सदस्य और टिपरा मोथा पार्टी के प्रमुख प्रद्योत किशोर देबबर्मा की बहन कृति देवी देबबर्मन को उम्मीदवार बनाया। रेबती भाजपा की त्रिपुरा इकाई की कोर कमेटी के सदस्य तो बने रहे, लेकिन पिछले दो वर्षों से पार्टी की गतिविधियों में उनकी सक्रियता लगभग नहीं के बराबर रही। हाल ही में घोषित भाजपा पदाधिकारियों की सूची में भी उनका नाम शामिल नहीं था।राजनीतिक करियर लगभग ठहर जाने के बाद रेबती त्रिपुरा ने अपने मूल पेशे में लौटने का फैसला किया और 20 जुलाई को दोबारा स्कूल में कार्यभार संभाल लिया।

 पूर्व सांसद ने कहा, 'पिछले ढाई वर्षों में पार्टी की कोर कमेटी के सदस्य के रूप में मेरे पास कोई काम नहीं था। इस दौरान मैंने केवल भाजपा जनजाति मोर्चा की एक बैठक में हिस्सा लिया। फिलहाल मेरे पास कोई विशेष राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं है, इसलिए मैंने सरकारी स्कूल में स्नातकोत्तर शिक्षक के अपने पुराने पेशे में लौटने का फैसला किया है।' उन्होंने कहा, 'अगर विद्यार्थियों के साथ मुझे सहज महसूस हुआ, तो मैं पढ़ाना जारी रखूंगा और यदि मन नहीं लगा, तो स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति भी ले सकता हूं। कम से कम इस नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ सुनिश्चित होंगे, जिनमें लगभग 50,000 रुपये मासिक पेंशन भी शामिल है। यह अच्छी-खासी राशि है।'

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