प्रयागराज: कृष्ण जन्माष्टमी हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आस्था, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाती है। यह दिन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और भक्ति का महापर्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में इसी पावन तिथि को मध्यरात्रि में देवकी के गर्भ से मथुरा के कारागार में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। हर साल जन्माष्टमी की तारीख को लेकर गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय में अलग-अलग मत होते हैं, लेकिन इस बार एक विशेष संयोग बन रहा है।
पंडित शिप्रा सचदेव ने न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा, "इस बार की कृष्ण जन्माष्टमी की खासियत यह है कि इस बार गृहस्थ जातक और साधुगण एक ही दिन यानी कि 4 सितंबर को ही कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाएंगे।"
उन्होंने बताया, "अष्टमी तिथि 3-4 सितंबर की मध्य रात्रि 2:30 बजे से शुरू होगी और 5 सितंबर को रात 12:30 बजे तक रहेगी। इसलिए जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 11.05 बजे से प्रारंभ हो रहा है और 12.35 तक रहने वाला है। इस दौरान भक्त पूरे विधि-विधान से भगवान कृष्ण की पूजा कर सकते हैं।"
पंडित शिप्रा ने मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष उपाय भी बताया। उन्होंने कहा, "अगर आपकी कोई भी इच्छा है या आप कृष्ण जी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो उन्हें एक चांदी की बांसुरी उपहार में जरूर चढ़ाएं। अगर घर में बाल गोपाल हैं तो उन्हें चांदी की बांसुरी चढ़ाएं और अगर आप मंदिर में चढ़ाना चाहते हैं और चांदी की नहीं चढ़ाना चाहते हैं, तो सामान्य बांसुरी खरीदकर उसमें अपनी विश डाल के श्री कृष्ण के चरणों में चढ़ा दीजिए।"
मान्यता है कि जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को बांसुरी अर्पित करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन मध्यरात्रि में बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाता है, उन्हें झूला झुलाया जाता है और माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है।
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