G-20 देशों में भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेज बढ़ सकती है, मूडीज ने GDP ग्रोथ का अनुमान 6% से बढ़ाकर 7% किया
New Delhi. नई दिल्ली। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया है। पहले एजेंसी ने 6% ग्रोथ का अनुमान लगाया था। मूडीज के मुताबिक मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था पर अपेक्षाकृत कम असर पड़ा है। मजबूत घरेलू मांग, सरकारी खर्च और सर्विस सेक्टर की गतिविधियां ग्रोथ को सहारा दे रही हैं।
मूडीज ने भारत की ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया
मूडीज के नए अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP 7% की दर से बढ़ सकती है। पहले एजेंसी ने इसके लिए 6% की ग्रोथ का अनुमान जताया था। एजेंसी के मुताबिक इस अनुमान के आधार पर भारत की अर्थव्यवस्था इस साल G-20 देशों में सबसे तेज गति से बढ़ सकती है। मिडिल ईस्ट में तनाव और संघर्ष के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर उतना असर नहीं पड़ा, जितना पहले अनुमान लगाया जा रहा था।
घरेलू मांग और सर्विस सेक्टर से मिला सहारा
मूडीज के अनुसार भारत की आर्थिक वृद्धि में घरेलू मांग की बड़ी भूमिका है। देश में निजी खपत मजबूत बनी हुई है। इसके साथ ही ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन यानी पूंजी निर्माण में भी तेजी बनी हुई है। प्राइवेट सेक्टर की तरफ से नए निवेश के शुरुआती संकेत भी दिखाई दे रहे हैं। वहीं सर्विस सेक्टर की गतिविधियां लगातार मजबूत बनी हुई हैं। इन सभी कारणों से भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों का सामना करने में मदद मिली है।
रेटिंग Baa3 और आउटलुक स्टेबल बरकरार
मूडीज ने भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को Baa3 पर बनाए रखा है। इसके साथ ही देश के लिए आउटलुक भी स्टेबल रखा गया है। एजेंसी के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था का आकार बड़ा है और इसमें कई अलग-अलग सेक्टर शामिल हैं। हालांकि सरकार पर कर्ज का बोझ और कम प्रति व्यक्ति आय अभी भी चुनौती बनी हुई है।
कच्चे तेल और महंगाई का जोखिम
मूडीज ने GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाने के साथ कुछ जोखिमों को लेकर भी चेताया है। इनमें सबसे प्रमुख मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और ऊर्जा की कीमतों से जुड़ा जोखिम है। अगर वहां युद्ध लंबा चलता है तो कच्चे तेल के दाम बढ़ सकते हैं। इसका असर भारत की महंगाई पर भी पड़ सकता है। मूडीज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई 4.8% रह सकती है, लेकिन तेल की कीमतों में तेजी आने पर यह अनुमान से ऊपर जा सकती है। वित्त वर्ष 2025-26 में महंगाई दर 2.4% थी। इसके अलावा एल नीनो और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताएं खाद्य पदार्थों की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। इससे लोगों की खर्च करने की क्षमता पर असर पड़ने की आशंका है।
विदेशी मुद्रा भंडार और तेल के अलग-अलग स्रोत मददगार
रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास मौजूद बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने में मदद कर सकता है। इसके अलावा कच्चे तेल की खरीद के लिए भारत के पास अलग-अलग स्रोत होने से भी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में किसी एक स्रोत पर निर्भरता का असर कम करने में मदद मिल सकती है।
राजकोषीय घाटा घटाने की रफ्तार धीमी पड़ने का खतरा
मूडीज के अनुसार सरकार राजकोषीय घाटे को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार ने इसे पिछले साल के 4.4% से घटाकर वित्त वर्ष 2026-27 में 4.3% करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतें बढ़ती हैं तो सरकार पर सब्सिडी का अतिरिक्त बोझ आ सकता है। इसके अलावा डिफेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च की जरूरत बनी रहने से सरकारी कर्ज में तेजी से कमी लाना मुश्किल हो सकता है।