भारतीय सेना होगी और मजबूत, 535 हथियारों और हेलीकॉप्टरों की खरीद की योजना
नई दिल्ली: भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना अपनी हवाई ताकत को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही हैं। दशकों पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों को बदलने के लिए दोनों सेनाएं सरकारी रक्षा कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से करीब 200 स्वदेशी लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) खरीदने की तैयारी कर रही हैं। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना की अनुमानित लागत 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। इन हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल विशेष रूप से ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में सैनिकों की आवाजाही, निगरानी, रसद पहुंचाने और अन्य सैन्य अभियानों के लिए किया जाएगा। चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इस परियोजना से भारतीय रक्षा उद्योग और स्वदेशी हेलीकॉप्टर निर्माण को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
400 हल्के हेलीकॉप्टरों की जरूरत, दो चरणों में होगी खरीद
भारतीय सेना और वायुसेना को अपने पुराने हेलीकॉप्टर बेड़े को बदलने के लिए लगभग 400 हल्के हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता है।इस जरूरत को पूरा करने के लिए दो अलग-अलग खरीद परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।पहली परियोजना के तहत HAL द्वारा विकसित करीब 200 स्वदेशी लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर खरीदे जाने की तैयारी है।रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 26 अक्टूबर 2026 को करीब 20 हजार करोड़ रुपये की लागत से 200 लाइट मल्टीरोल हेलीकॉप्टरों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।यह मंजूरी खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण कार्रवाई है। इसे अंतिम खरीद अनुबंध नहीं माना जाना चाहिए।दोनों परियोजनाओं के माध्यम से भारतीय सेनाओं को आधुनिक तकनीक से लैस हल्के हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
HAL ने तैयार किए 12 हेलीकॉप्टर, 187 और खरीदने की तैयारी
रक्षा अधिकारियों के अनुसार, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड अब तक 12 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर तैयार कर चुकी है।इसके अलावा 187 अतिरिक्त हेलीकॉप्टरों की खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।इनकी संख्या जोड़ने पर कुल 199 हेलीकॉप्टर हो जाएंगे, जिन्हें लगभग 200 हेलीकॉप्टरों की प्रस्तावित खरीद के रूप में देखा जा रहा है।इस परियोजना का अनुमानित मूल्य 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है।हालांकि, अतिरिक्त हेलीकॉप्टरों के लिए अंतिम अनुबंध, उत्पादन और आपूर्ति कार्यक्रम की प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है।अक्टूबर 2026 की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, LUH का सैन्य प्रमाणन और मिशन उपकरणों का एकीकरण अंतिम चरण में पहुंच चुका है।आवश्यक प्रमाणन मिलने के बाद HAL का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 में शुरुआती 12 हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति करना है।
चीन सीमा और सियाचिन जैसे इलाकों में निभाएंगे अहम भूमिका
भारतीय सेना के लिए हल्के हेलीकॉप्टर बेहद महत्वपूर्ण हैं। खासकर हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में इनकी उपयोगिता बढ़ जाती है।भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा, लद्दाख, सियाचिन और अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में सैन्य चौकियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है।कई स्थानों पर सड़क संपर्क सीमित होने और मौसम खराब रहने के कारण सैनिकों तथा आवश्यक सामग्री की आपूर्ति में हेलीकॉप्टरों की मदद ली जाती है।हल्के हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल सैनिकों की आवाजाही, आवश्यक उपकरण पहुंचाने, सीमावर्ती इलाकों की निगरानी और टोही अभियानों में किया जाता है।इनका आकार अपेक्षाकृत छोटा होने के कारण वे सीमित स्थानों वाले हेलीपैड पर संचालन के लिए उपयोगी हो सकते हैं।नए हेलीकॉप्टरों की मदद से सेना की त्वरित प्रतिक्रिया और दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच बनाने की क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है।
220 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकेगा LUH
HAL ने लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर को आधुनिक सैन्य जरूरतों के अनुसार डिजाइन किया है।यह लगभग तीन टन श्रेणी का नई पीढ़ी का हेलीकॉप्टर है, जिसमें आधुनिक ग्लास कॉकपिट और मल्टी-फंक्शन डिस्प्ले जैसी सुविधाएं शामिल हैं।इसमें एक टर्बोशाफ्ट इंजन लगाया गया है, जिसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संचालन की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।प्रस्तावित तकनीकी क्षमताओं के अनुसार, यह हेलीकॉप्टर लगभग 220 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकेगा।इसकी अधिकतम परिचालन ऊंचाई करीब 6.5 किलोमीटर और 500 किलोग्राम भार के साथ अनुमानित रेंज लगभग 350 किलोमीटर बताई गई है।हालांकि, वास्तविक उड़ान प्रदर्शन मौसम, ऊंचाई, तापमान और हेलीकॉप्टर पर मौजूद भार से प्रभावित हो सकता है।इन विशेषताओं के कारण LUH को पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों का आधुनिक विकल्प माना जा रहा है।
क्यों जरूरी हो गया चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों को बदलना?
भारतीय सशस्त्र बल लंबे समय से चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।इन हेलीकॉप्टरों का मूल डिजाइन कई दशक पुराना है। समय के साथ इनकी परिचालन क्षमता, रखरखाव और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां बढ़ी हैं।रक्षा मंत्रालय पहले भी पुराने हेलीकॉप्टरों को बदलने की आवश्यकता स्वीकार कर चुका है।इन पुराने हेलीकॉप्टरों ने वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में सैन्य सेवाएं दी हैं, लेकिन आधुनिक सैन्य अभियानों के लिए नई तकनीक वाले प्लेटफॉर्म की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है।नई खरीद प्रक्रिया इसी आवश्यकता को पूरा करने का हिस्सा है।
टाटा और अदाणी जैसी निजी कंपनियों को भी मिलेगा मौका
200 लाइट मल्टीरोल हेलीकॉप्टरों की दूसरी परियोजना में भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।रक्षा अधिकारियों के अनुसार, भारतीय कंपनियां विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं के साथ साझेदारी करके देश में हेलीकॉप्टरों का उत्पादन कर सकेंगी।इस परियोजना में टाटा समूह के एयरबस के साथ और अदाणी समूह के इटली की लियोनार्डो कंपनी के साथ भागीदारी करने की संभावना जताई गई है।अमेरिका की बेल हेलीकॉप्टर्स भी इस खरीद कार्यक्रम में अपनी पेशकश कर सकती है।भारतीय सेना की ओर से संबंधित निविदा जारी होने के बाद कंपनियां औपचारिक रूप से बोली प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेंगी।इसका उद्देश्य देश में विमानन निर्माण क्षमता बढ़ाने के साथ तकनीकी सहयोग और प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना भी है।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बढ़ावा, छोटे उद्योगों के लिए अवसर
HAL के स्वदेशी हेलीकॉप्टर कार्यक्रम को आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।बड़े पैमाने पर हेलीकॉप्टरों के निर्माण से देश की रक्षा विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।इस परियोजना में केवल HAL ही नहीं, बल्कि कलपुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मशीनिंग और अन्य तकनीकी सेवाएं देने वाले छोटे एवं मध्यम उद्योगों को भी कारोबारी अवसर मिलने की संभावना है।
देश में हेलीकॉप्टर उत्पादन बढ़ने से इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।हालांकि, प्रस्तावित खरीद का वास्तविक प्रभाव अंतिम अनुबंध, उत्पादन की गति और आपूर्ति कार्यक्रम पर निर्भर करेगा।फिलहाल सेना और वायुसेना के लिए करीब 200 स्वदेशी LUH की खरीद योजना पुराने हेलीकॉप्टर बेड़े के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।