भारत डब्ल्यूटीओ के समझौते को वित्त मंत्री लागू करने के लिए बाध्य, बदला जा सकते है सब्सिडी के तरीके

सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए पिछले वर्ष फरवरी में पेश बजट में ही यह साफ कर दिया था कि सब्सिडी का पूरा गणित बदलने का मन बनाया जा चुका है।

Update: 2022-01-22 17:00 GMT

सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए पिछले वर्ष फरवरी में पेश बजट में ही यह साफ कर दिया था कि सब्सिडी का पूरा गणित बदलने का मन बनाया जा चुका है। आगामी बजट में सब्सिडी को लेकर सरकार को इस बार कुछ सख्त फैसले करने होंगे। वजह यह है कि अगले वर्ष से विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के तहत सब्सिडी मुक्त व्यवस्था लागू होने वाली है।

भारत डब्ल्यूटीओ के इस समझौते को लागू करने के लिए बाध्य है। इसके तहत खाद्य व कृषि सेक्टर को सब्सिडी के मौजूदा तरीके को बदलना होगा।अभी देश में खाद्य सुरक्षा कानून की वजह से सब्सिडी में बड़ी कटौती नहीं की जा सकती है। वित्त मंत्री ने खाद्य सब्सिडी की राशि चालू वित्त वर्ष के लिए करीब 2.43 लाख करोड़ रुपये निर्धारित की हुई है। जबकि एक वर्ष पहले 4.23 लाख करोड़ रुपये की राशि बतौर खाद्य सब्सिडी दी गई थी।
जानकारों का कहना है कि अगले वित्त वर्ष के दौरान खाद्य सब्सिडी बिल 2.50 लाख करोड़ रुपये के करीब होगी। फर्टिलाइजर सब्सिडी के मोर्चे पर सबसे ज्यादा चुनौती की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में फर्टिलाइजर की कीमतों में काफी उछाल आया है। वर्ष 2020-21 में फर्टिलाइजर सब्सिडी की राशि 71,309 करोड़ रुपये थी जिसे वर्ष 2021-22 में बढ़ाकर 79,530 करोड़ रुपये किया गया है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतों को देखते हुए वास्तविक तौर पर इसके 1.10 लाख करोड़ रुपये के आस पास पहुंचने की संभावना है।कभी सरकार के लिए भारी मुसीबत बनने वाली पेट्रोलियम सब्सिडी अब पूरी तरह नियंत्रण में है।
चालू वित्त वर्ष के बजटीय प्रपत्रों के मुताबिक सरकार ने पेट्रोलियम सब्सिडी में एकमुश्त 27,920 करोड़ रुपये की कटौती की थी। पेट्रोल व डीजल के बाद एलपीजी पर भी सब्सिडी लगभग खत्म हो चुकी है। उज्ज्वला योजना के तहत कनेक्शन वितरण का काम हो चुका है और इस मद में भी सब्सिडी बढ़ने की कोई संभावना नहीं है। ऐसे में वर्ष 2021-22 के लिए पेट्रोलियम सब्सिडी के मद में आवंटित 12,995 करोड़ रुपये की राशि अगले वित्त वर्ष के लिए और कम की जा सकती है। केरोसिन सब्सिडी भी अब बीते दिन की बात हो गई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राजकोषीय घाटे में सब्सिडी की हिस्सेदारी वर्ष 2025-26 तक घटाकर चार प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा है। अच्छी बात यह है कि कोरोना की किसी और लहर की संभावना नहीं के बराबर है, तो इस मद में किसी सब्सिडी का दबाव नहीं रहेगा।


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