भारत-अमेरिका मजबूत साझेदार, लेकिन सहयोगी नहीं; मतभेद बने रहेंगे: रिटायर्ड ब्रिगेडियर अद्वितीय मदान

Update: 2026-06-27 15:04 GMT
Patiala पटियाला। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रिटायर्ड ब्रिगेडियर अद्वितीय मदान ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी बेहद मजबूत है, लेकिन इसे पूर्ण सैन्य या राजनीतिक गठबंधन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसलिए दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद बने रहना स्वाभाविक है।
ब्रिगेडियर मदान ने कहा कि भारत और अमेरिका आज रक्षा, व्यापार, तकनीक, इंडो-पैसिफिक रणनीति और वैश्विक सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में एक-दूसरे के करीबी साझेदार हैं। हालांकि, दोनों देशों की अपनी-अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताएं और हित हैं, जिनके कारण कई बार अलग-अलग दृष्टिकोण देखने को मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंधों को लेकर लोगों को अपनी अपेक्षाएं यथार्थवादी रखनी चाहिए। दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीकी सहयोग, वीजा नीति और कुछ भू-राजनीतिक मुद्दों पर मतभेद भविष्य में भी जारी रह सकते हैं। इसके बावजूद यह संबंध लगातार मजबूत होते रहेंगे, क्योंकि दोनों लोकतांत्रिक देशों के साझा रणनीतिक हित हैं।
रिटायर्ड ब्रिगेडियर ने यह भी कहा कि किसी भी दो बड़े देशों के बीच सभी मुद्दों पर पूरी सहमति होना जरूरी नहीं है।
महत्वपूर्ण
यह है कि मतभेदों के बावजूद सहयोग और संवाद की प्रक्रिया जारी रहे। उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को परिपक्व और व्यावहारिक बताते हुए कहा कि दोनों देश वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वहीं, कुछ मुद्दों पर मतभेद होने के बावजूद दोनों देशों के संबंध आने वाले वर्षों में और मजबूत होने की संभावना है।
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