पटना। बिहार विधान परिषद चुनाव में सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज करने वाले राहुल राज भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी जीत को व्यक्तिगत उपलब्धि मानने के बजाय शिक्षकों की जीत बताया। इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक रुख, एनडीए प्रत्याशी को लेकर चुनावी मुकाबले और शिक्षकों की लंबित मांगों पर विस्तार से बात की। राहुल राज ने साफ कहा कि वह भाजपा-जदयू परिवार से अलग नहीं हैं और आगे भी इसी विचारधारा के साथ जुड़े रहेंगे।
राहुल राज ने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि उन शिक्षकों की जीत है, जिन्होंने उन्हें विधान परिषद तक पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने अपनी समस्याओं और मांगों को सदन तक पहुंचाने के लिए उन्हें चुना है। अब उनकी जिम्मेदारी होगी कि वे शिक्षकों के हितों के लिए लगातार आवाज उठाएं।
बोले- मैंने NDA नहीं कम्युनिस्ट प्रत्याशी को हराया
चुनाव परिणाम को लेकर राहुल राज ने कहा कि उन्होंने एनडीए के प्रत्याशी को नहीं, बल्कि कम्युनिस्ट विचारधारा के प्रत्याशी को हराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित उम्मीदवार पहले कम्युनिस्ट पार्टी से चुनाव लड़ चुके थे और चुनाव से महज 10 से 15 दिन पहले जदयू में शामिल हुए थे।
राहुल राज ने कहा कि जमीन पर काम करने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए इतने कम समय में किसी दूसरे राजनीतिक दल से आए व्यक्ति को स्वीकार करना आसान नहीं होता। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कार्यकर्ता इस बदलाव को इतनी जल्दी स्वीकार कर पाएंगे? उनके मुताबिक, यही वजह चुनावी माहौल में भी देखने को मिली।
उन्होंने कहा कि अगर भाजपा या जदयू परिवार का कोई प्रत्याशी चुनाव मैदान में होता, तो वह उसके समर्थन में पूरी मजबूती से खड़े होते। राहुल राज ने अपने पुराने राजनीतिक अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने पार्टी के फैसले को स्वीकार किया और पार्टी द्वारा घोषित उम्मीदवारों का समर्थन किया था।
गठबंधन की मजबूरी पर टिप्पणी से किया इनकार
राहुल राज ने गठबंधन की राजनीति को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पार्टी की कुछ राजनीतिक मजबूरियां रही होंगी, लेकिन वह इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं समझते। उन्होंने दोहराया कि वह भाजपा परिवार और उसकी विचारधारा से अलग नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा, "मैं तो इसी घर में था, हूं और भविष्य में भी रहूंगा। मैं इस विचारधारा से अलग कहां रहा हूं?" उनके इस बयान को चुनाव में निर्दलीय उतरने के बाद भाजपा के साथ अपने राजनीतिक संबंधों को स्पष्ट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
शिक्षकों की मांगों पर मुख्यमंत्री ने दिया भरोसा
राहुल राज ने बताया कि चुनाव के दौरान उन्होंने शिक्षकों के साथ बैठकें की थीं और उनकी समस्याओं को समझा था। इसके बाद उन्होंने सांसद राजीव प्रताप रूडी के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस मुलाकात में शिक्षकों की लंबित मांगों को मुख्यमंत्री के सामने रखा गया। राहुल राज के अनुसार, मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों को न्यायसंगत बताते हुए आश्वासन दिया कि इन पर एक-एक करके काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया है। इसी आश्वासन के बाद वह अपने राजनीतिक परिवार के बीच फिर से सक्रिय नजर आ रहे हैं।
7वें वेतन आयोग के अनुसार वेतनमान की मांग
शिक्षकों के वेतनमान को लेकर राहुल राज ने कहा कि पार्टी पहले ही सातवें वेतन आयोग के अनुरूप वेतनमान देने की बात कह चुकी है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की लंबित मांगों को पूरा कराने के लिए वह लगातार प्रयास करेंगे। उन्होंने बिहार के शिक्षा मंत्री को शिक्षकों का अभिभावक बताते हुए कहा कि वह भी बिहार के ही जनप्रतिनिधि हैं और शिक्षा मंत्री से मिलकर शिक्षकों की समस्याओं को उठाएंगे। राहुल राज ने भरोसा जताया कि शिक्षकों की जायज मांगों को पूरा कराने के लिए सरकार के सामने प्रभावी तरीके से पक्ष रखा जाएगा।
शिक्षकों के मुद्दे रहेंगे प्राथमिकता में
सारण से निर्दलीय विधान परिषद सदस्य बने राहुल राज के बयान से बिहार की राजनीति में गठबंधन और पार्टी कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में भाजपा-जदयू परिवार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। अब देखना होगा कि शिक्षकों की वेतन संबंधी मांगों और अन्य लंबित मुद्दों को सदन तथा सरकार के स्तर पर आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका कितनी प्रभावी रहती है।
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