Kamand. कमांद। हिमाचल प्रदेश के आईआईटी मंडी ने समुद्री तकनीक के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए मानव रहित अंडरवाटर पनडुब्बी और जल रोबोट प्रणाली विकसित की है। इस तकनीक को समुद्र की गहराइयों में रिसर्च, निगरानी और सुरक्षा कार्यों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आईआईटी मंडी का यह प्रोजेक्ट डीआरडीओ के सहयोग से विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य देश की अंडरवाटर टेक्नोलॉजी को नई दिशा देना है।
इस परियोजना के तहत विकसित की गई मानव रहित पनडुब्बी को विशेषज्ञों ने “फिश” नाम दिया है, जिसका आकार लगभग पांच से छह फुट के बीच है। यह पूरी तरह से रिमोटली ऑपरेटेड और मानव रहित प्रणाली है, जिसे समुद्र के अंदर बिना किसी चालक के संचालित किया जा सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य समुद्र की गहराइयों में जोखिम भरे कार्यों को सुरक्षित और आसान बनाना है।
आईआईटी मंडी की टीम इस प्रोजेक्ट के तहत विभिन्न प्रकार के अंडरवाटर रोबोट्स पर काम कर रही है, जिनमें रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल, बायो-इंस्पायर्ड फिश रोबोट और मॉड्यूलर सरफेस वेसल शामिल हैं। इन रोबोट्स का उपयोग समुद्र के भीतर निरीक्षण, सफाई और निगरानी जैसे कार्यों में किया जाएगा। इसके साथ ही ये तकनीक डाइवर्स और तकनीकी कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी मदद करेगी।
इस प्रोजेक्ट का संचालन विशेषज्ञ नरेंद्र के नेतृत्व में किया जा रहा है। टीम में इंटरडिसिप्लिनरी विशेषज्ञ, इंडस्ट्री पार्टनर्स और डिफेंस टेक्नोलॉजी से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हैं। परियोजना का मुख्य लक्ष्य ऐसे प्रोटोटाइप विकसित करना है जिन्हें वास्तविक परिस्थितियों में उपयोग किया जा सके और वे व्यावहारिक समाधान प्रदान करें। आईआईटी मंडी के निदेशक लक्ष्मीधर बेहरा के अनुसार, यह तकनीक भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि इन रोबोट्स का उपयोग समुद्री कार्यों में जोखिम को कम करेगा और आधुनिक तकनीक के माध्यम से दक्षता बढ़ाएगा।
इन अंडरवाटर रोबोट्स में कैमरे, अल्ट्रासोनिक सेंसर, आईएमयू और डीवीएल जैसी आधुनिक सेंसिंग तकनीक का उपयोग किया गया है। इसके अलावा इनमें पावर सेविंग मॉड्यूलर थ्रस्टर सिस्टम और बायो-इंस्पायर्ड मूवमेंट तकनीक शामिल है, जिससे यह मछली की तरह पानी में आसानी से गति कर सकते हैं। यह तकनीक इन्हें कम रोशनी और गहरे पानी में भी प्रभावी ढंग से काम करने में सक्षम बनाती है।
यह पूरी प्रणाली स्वदेशी मॉड्यूलर मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर पर आधारित है, जो भारत की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता का मजबूत उदाहरण प्रस्तुत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के विकास से समुद्री अनुसंधान, रक्षा क्षेत्र और औद्योगिक उपयोग में नए अवसर खुलेंगे। आईआईटी मंडी की यह पहल न केवल वैज्ञानिक शोध को आगे बढ़ाएगी, बल्कि समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आने वाले समय में इस तकनीक के और उन्नत संस्करण विकसित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।