स्टेज-वन पूरा होने पर सरकार स्टेज-टू में नहीं गई, तो समाप्त हो जाएगा केस
Hospice. धर्मशाला। प्रदेश की शिक्षा क्षेत्र में बड़ी एवं महत्त्वाकांक्षी परियोजना केंद्रीय विश्वविद्यालय के धर्मशाला कैंपस के लिए मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट एवं फोरेस्ट को जमा होने वाली 30 करोड़ की राशि समय पर जमा न होने से इसकी राशि बढ़ सकती है। इतना ही नहीं, वन संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम 1980 के तहत स्ेटज वन से स्टेज टू में जाने के लिए लगाई कई शर्तें समय पर पूरा न होने के कारण यह केस समाप्त भी हो सकता है, जिससे हिमाचल प्रदेश और खासकर कांगड़ा व चंबा को बड़ा झटका लगेगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने धर्मशाला के जदरांगल स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय के कैंपस निर्माण के लिए 250 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं।
इतना ही नहीं, सीपीडब्ल्यूडी ने बाकायदा केंद्र से धनराशि जारी होने के बाद परियोजना निर्माण के लिए टेंडर भी कर दिया है। निर्माण कंपनी ने मशीनरी भी जदरांगल में लाकर रख दी थी, लेकिन राज्य सरकार की ओर से वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को 30 करोड़ रुपए जमा करवाने थे, जिसके लिए स्टेज वन से स्टेज टू में जाने की प्रक्रिया पूरी होनी थी, लेकिन सियासी कारणों से निर्धारित समय में यह राशि जमा नहीं हो पाई। इससे मामला लटक गया है। हालांकि अन्य परियोजनाओं में कुछ काम शुरू हो जाता है, तो वन एवं पर्यावरण विभाग की मंजूरी रद्द नहीं हो पाती है, लेकिन जगदरांगल में केंद्रीय विश्वविद्यालय के पास करीब 24 हेक्टेयर अपनी भूमि होने के बावजूद वहां राजनीतिक दबाब के कारण काम ही शुरू नहीं हो पाया। इसके चलते राज्य की यह बड़ी एवं महत्त्वाकांक्षी परियोजना लटक गई। हालांकि इसी विश्वविद्यालय के दूसरे कैंपस का देहरा में चल रहा कार्य तेज गति से चल रहा है। अगले शैक्षणिक सत्र में कुछ विभाग देहरा में शिफ्ट हो जाएंगे।