हिमाचल। हिमाचल में चल रहे चिडिय़ाघर तथा वन्यजीव केंद्र घाटे का सौदा साबित हो रहे है। हालात यह है कि इनकी अपनी कमाई से भी खर्चे पूरे नहीं हो पा रहे है। अधिकांश केंद्रों को संचालन और रखरखाव के लिए सरकारी अनुदान पर निर्भर रहना पड़ रहा है। रिवालसर और रेणुका जी मिनी चिडिय़ाघर में अपनी आय कुल खर्च का महज चार फीसदी है। प्रदेश के चिडिय़ाघरों के नेटवर्क ने एक साल में करीब 1.65 करोड़ की अपनी आय अर्जित की, जबकि कुल खर्च 6.94 करोड़ रुपए रहा। हालांकि सरकार से ग्रांट इन एड के रूप में
चार करोड़
की राशि भी विभाग को मिली है। वन विभाग की तरफ से वर्ष 2025-26 की जारी की वार्षिक रिपोर्ट में यह तथ्य निकल कर सामने आए है। चिडिय़ाघरों और वन्य जीव केंद्रों की आय का प्रमुख स्रोत पर्यटकों से मिलने वाला प्रवेश शुल्क है। इसके अलावा पार्किंग, दुकानों और कैफेटेरिया के किराए, वन विश्राम गृहों तथा स्मृति चिन्हों की बिक्री से भी कमाई होती है।
हालांकि, पशुओं के भोजन, दवाइयों, बिजली-पानी, कर्मियों और रखरखाव पर होने वाला खर्च इनकी आय से कहीं अधिक है। हालांकि शिमला के कुफरी स्थित हिमालयन नेचर पॉर्क कुफरी नेचर पार्क की अपनी आय उसके दर्ज खर्च से अधिक है। पार्क ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 1,02,34,897 रुपए की आय अर्जित की। इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन टिकटों की बिक्री से 94,04,230 रुपए मिले। थ्री-डी थिएटर, कार पार्किंग, कैफेटेरिया और रेस्ट हाउस तथा स्मृति चिह्नों की दुकान से से भी आय प्राप्त हुई है। इस अवधि में पार्क का कुल खर्च 61,51,097 रुपए रहा। सराहन स्थित पीजेंट्री में पर्यटकों के प्रवेश से वर्ष 2025-26 में केवल 4,910 रुपए की आय हुई। इस केंद्र का कुल खर्च 11,40,000 रुपए रहा। रेणुका जी मिनी चिडिय़ाघर में रेस्ट हाउस से 3,19,500 रुपए और टिकटों से 22,805 रुपए की राशि अर्जित हुई है। चिडिय़ाघर में पशुओं के भोजन, दवाइयों और बाघों के बाड़े के निर्माण जैसे कार्यों पर 77,50,864 रुपए खर्च हुआ है।
मंडी जिला के रिवालसर स्थित मिनी चिडिय़ाघर में वर्ष के दौरान 18,688 पर्यटक पहुंचे। यहां प्रवेश शुल्क और स्मृति चिह्नों की बिक्री सहित कुल आय 3,59,300 रुपए रही। इसके मुकाबले चिडिय़ाघर पर कुल 88,80,000 रुपए खर्च किए गए, जिसमें पशुओं के चारे और खाद्य सामग्री पर 19 लाख रुपए तथा बाड़ों, परिसर के विकास, प्रवेश द्वार और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों पर 69.80 लाख रुपए का खर्च भी शामिल है। शिमला के चौड़ा मैदान स्थित हिमालयन बर्ड पार्क में टिकटों और स्मृति चिन्हों की बिक्री से आय हुई। उपलब्ध आंकड़ों में टिकटों की बिक्री से 2,27,965 रुपए और स्मृति चिन्हों से 1,519 रुपए की राशि दर्ज है। इस तरह रिपोर्ट में कुल आय 2,29,484 रुपए दर्शाई गई है। पक्षियों के लिए फल-सब्जियों और अनाज की व्यवस्था, सूखी घास, बिजली तथा टिकट बुकलेट पर कुल व्यय 5,54,486 रुपए हुआ है।
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