सिरोही। सिरोही प्राकृतिक, नैसर्गिक सौन्दर्य के बीच विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीवों को अपने आप में समेटे माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य 328.46 वर्ग किलोमीटर की परिधि में फैला हुआ है। जहां बेशकीमती जड़ी बूटियों से लेकर वनसंपदा व वन्यजीवों के संरक्षण की कारगर योजना को मूर्त रूप देना चुनौतीपूर्ण कार्य है। घने पेड़-पौधों से आच्छादित वन्य क्षेत्र में बघेरे, भालू, जंगली सूअर, चिंकारा, भेड़िए, जरख, जंगली मुर्गे, खरगोश, बिजू, रोजड़ेे, सियार, लोमड़ी, लंगूर, तीतर, बटेर, सारस, सेही, नेवला, गोह, मोर, कछुआ, बाज, गिद्ध, तोता, कोयल, जलमुर्गी, बूटार, लाज ग्रीव बारवेड आदि थलचर, नभचर, जलचर वन्य प्राणियों के साथ यहां रेंगने वाले जीवों की विभिन्न प्रजातियां बहुतायत में पाई जाती थी। इस जैव विविधता के संरक्षण योजना की आवश्यकता है। जानकारों की मानें तो गर्मी के दिनों में धधकते दावानलों की चपेट में आने से दुर्लभ वनसंपदा के साथ ही वन्यजीव भी चपेट में आ जाते हैं।
जिससे जैव चक्र गड़बड़ाता जा रहा है। वहीं बढ़ती मानवीय जरूरतों व प्राकृतिक परिवर्तनों के कारण जंगल उजड़ते जा रहे हैं। जिसके चलते वन्यजीवों के घने वनों के अभाव में पलायन करने या दम तोड़ने से माउंट आबू की जैव विविधता खतरे में है। वन विभाग सूत्रों के अनुसार 2022 वन्यजीव गणना सूची के तहत मांसाहारी वन्यजीवों में बघेरे 55, सियार 129, जरख 49, जंगली बिल्ली 107, लोमड़ी 31, भालू 218, बिज्जू 150, कबर बिज्जू 22 दर्ज किए गए। शाकाहारी वन्यजीवों में सांभर 68, रोजडे नीलगाय 229, जंगली सूअर 545, सेही 163, लंगूर 3230 दर्ज किए गए। पक्षियों की गणना के तहत जंगली मुर्गा 1688, शिकारी पक्षी (बर्डस ऑफ प्रे) 37, मोर 1634 दर्ज किए गए हैं। जबकि 2023 में बारिश समय से पहले होने से वन्यजीवों की संख्या की गिनती नहीं की जा सकी। बढ़ती मानवीय आवश्यकताओं, निरंतर वनों में लगती आग की घटनाएं व प्राकृतिक परिवर्तन के कारण जंगल उजड़ रहे हैं। इसको रोकने, वन संपदा के साथ वन्य प्राणियों पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव से उन्हें बचाने के कारगर प्रयासों की जरूरत है।