PNB की करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ के नकली नोट, NIA ने दो मुख्य आरोपियों को दबोचा
दिल्ली। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट से 17.29 करोड़ रुपये के नकली भारतीय नोट मिलने के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने नकली नोटों की छपाई और सप्लाई की कथित साजिश में शामिल दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अजय कुमार और हरीश रौंता के रूप में हुई है। दोनों की गिरफ्तारी के बाद मामले में पकड़े गए आरोपियों की संख्या सात हो गई है।
अंबाला और मनाली से पकड़े गए आरोपी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एनआईए ने अजय कुमार को 16 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के अंबाला से गिरफ्तार किया। वहीं, दूसरे आरोपी हरीश रौंता को 22 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश के मनाली से पकड़ा गया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, दोनों आरोपी नकली भारतीय मुद्रा तैयार करने और उसकी आपूर्ति से जुड़े कथित नेटवर्क का हिस्सा थे। आरोप है कि नकली नोटों को अन्य सहयोगियों के माध्यम से सहारनपुर स्थित पीएनबी की करेंसी चेस्ट तक पहुंचाया गया था।
29 अगस्त को सामने आया था मामला
यह मामला 29 अगस्त 2026 को सामने आया था, जब सहारनपुर के सिविल लाइंस स्थित पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट से 17.29 करोड़ रुपये अंकित मूल्य के नकली नोट मिलने की सूचना पुलिस को दी गई थी।
प्रारंभिक जांच में बैंक के तीन कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई थी। इसके बाद बैंक प्रबंधन ने तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था।
सहारनपुर के सदर बाजार थाने में एफआईआर नंबर 0431/2026 दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एनआईए ने 3 सितंबर को जांच अपने हाथ में ले ली।
पहले पांच आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
इस मामले में एनआईए पहले ही अमित कुमार, आदेश चौधरी, मुकेश कुमार, राजेंद्र और नीतू को गिरफ्तार कर चुकी है।
जांच एजेंसी के अनुसार, अजय कुमार और हरीश रौंता पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों के करीबी सहयोगी हैं। अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि नकली नोट कहां छापे गए और उन्हें बैंक की करेंसी चेस्ट तक किस तरीके से पहुंचाया गया।
पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटी एनआईए
एनआईए नकली नोटों की छपाई, परिवहन और वितरण से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। एजेंसी अन्य संदिग्धों और फरार आरोपियों की तलाश में भी जुटी है।
जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली भारतीय मुद्रा बैंक की करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंची और इस कथित साजिश में किन-किन लोगों की भूमिका रही।