Raebareli. रायबरेली। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में पुलिस ने एक ऐसे शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया है, जो अलग-अलग फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगने का काम करता था। आरोपी खुद को कभी मुख्यमंत्री का ओएसडी, कभी क्राइम ब्रांच का अधिकारी और कभी कमांडो बताकर लोगों पर रौब जमाता था और विश्वास में लेकर ठगी करता था।
पुलिस के अनुसार इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब शहर कोतवाली क्षेत्र के निवासी मनीष अग्रवाल ने शिकायत दर्ज कराई। मनीष ने बताया कि वह अपना नया बना मकान बेचना चाहते थे, इसी दौरान जौनपुर निवासी राणा प्रताप सिंह ने उनसे संपर्क किया। आरोपी ने खुद को क्राइम ब्रांच का बड़ा अधिकारी बताकर मकान खरीदने की इच्छा जताई। सौदे के दौरान आरोपी ने मनीष को तीन चेक दिए, लेकिन उसके व्यवहार और बातचीत पर शक होने लगा। बाद में जब चेकों की जांच की गई तो वे संदिग्ध पाए गए। इसके बाद पीड़ित ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही पुलिस और सर्विलांस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी राणा प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जब उसकी तलाशी ली तो उसके पास से फर्जी आईडी कार्ड, पुलिस की वर्दी और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए, जिससे उसके फर्जीवाड़े की पूरी कहानी सामने आ गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी बेहद शातिर तरीके से काम करता था। वह लोगों को अपने पद और वर्दी के जरिए प्रभावित करता था और फिर उन्हें ठगी का शिकार बनाता था। उसका उद्देश्य लोगों का विश्वास जीतकर उनसे लाखों रुपये हड़पना था।
सीओ सिटी अरुण नौहवार ने बताया कि आरोपी केवल क्राइम ब्रांच अधिकारी ही नहीं बल्कि कभी खुद को मुख्यमंत्री का ओएसडी और कभी कमांडो बताकर भी लोगों को भ्रमित करता था। उसकी पहचान बदलने की यह रणनीति लोगों को झांसे में लेने के लिए इस्तेमाल की जाती थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने अब तक कई लोगों को अपना निशाना बनाया है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उसके साथ इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। रायबरेली पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति की वर्दी या पद देखकर बिना जांच-परख के भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध लगे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके।