Lathi-charge वाले बयान पर घिरे प्रियांक खरगे, विपक्ष ने कांग्रेस को घेरा

Update: 2026-08-03 11:25 GMT

नई दिल्ली/बेंगलुरु :  NEET पेपर लीक और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार हमला कर रही कांग्रेस अब कर्नाटक में अपनी ही सरकार के एक मंत्री के बयान को लेकर घिर गई है। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे के उस बयान पर विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी अपना आंदोलन जारी रखते हैं तो पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ सकता है। प्रियांक खरगे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे हैं।

दरअसल, दिल्ली में NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी केंद्र सरकार को घेर रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया और पैलेट गन तक का इस्तेमाल किया गया। इसी बीच कर्नाटक के गृह मंत्री का बयान सामने आने के बाद भाजपा समेत विपक्षी दलों ने कांग्रेस पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया है।

प्रियांक खरगे ने अपने इस्तीफे की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर लंबे समय तक आंदोलन करते हैं और स्थिति बिगड़ती है तो पुलिस कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने कहा, "मैं इस्तीफा दे दूंगा, लेकिन पहले उम्मीदवारों को 25 दिन की भूख हड़ताल पर जाने दीजिए। इसके बाद भी अगर वे नहीं मानते हैं तो हम उन पर लाठीचार्ज करेंगे और उसके बाद ही मैं इस्तीफा दूंगा। जैसा उन्होंने NEET पेपर लीक के बाद किया था।"

उनका यह बयान कर्नाटक में सिविल पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बीच आया। विजयपुरा जिले के टिकोटा स्थित एक परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों ने कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। अभ्यर्थियों का आरोप था कि प्रश्नपत्र करीब 30 मिनट देरी से बांटे गए और अलग-अलग परीक्षा कक्षों में अलग-अलग नियम अपनाए गए। इसके बाद कई उम्मीदवार परीक्षा केंद्र से बाहर निकल गए और उन्होंने दोबारा परीक्षा कराने की मांग उठाई।

हालांकि परीक्षा अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि परीक्षा कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आयोजित की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि जिन अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट लेकर परीक्षा हॉल छोड़ा, उन्हें नियमों के तहत दोबारा प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।

यह भर्ती परीक्षा 3,991 सिविल पुलिस कांस्टेबल पदों के लिए आयोजित की गई थी। इसमें पूरे राज्य के 800 से अधिक केंद्रों पर करीब 4.54 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। अधिकारियों के अनुसार, शिकायतें केवल कुछ परीक्षा केंद्रों तक सीमित थीं और बाकी जगह परीक्षा सामान्य तरीके से संपन्न हुई।

विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस सरकार पर हमला तेज कर दिया है। भाजपा नेता आर अशोक ने प्रियांक खरगे के बयान को अभ्यर्थियों के प्रति असंवेदनशील बताया और उनके इस्तीफे की मांग की। उन्होंने प्रभावित परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठाई।

वहीं प्रियांक खरगे ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा के पुराने कार्यकाल का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जब पिछली भाजपा सरकार के दौरान पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती घोटाला सामने आया था, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री और गृह मंत्री ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि लाखों उम्मीदवारों में से केवल कुछ अभ्यर्थियों ने ही आपत्ति दर्ज कराई है।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और छात्रों के आंदोलनों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। जहां विपक्ष सरकार पर युवाओं की आवाज दबाने का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकारें परीक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कर रही हैं। आने वाले दिनों में यह मामला कर्नाटक की राजनीति में और गर्माने के संकेत दे रहा है।

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