Delhi दिल्ली: सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान (एसएसआईएफ) में आईएफएस अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस ट्रेनिंग कार्यक्रम के बीच में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने 2002 और 2003 बैच के आईएफएस अधिकारियों से मुलाकात की।
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें साझा कर लिखा, "सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान में मिड-करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम कर रहे 2002 और 2003 बैच के आईएफएस अधिकारियों से बात करके खुशी हुई। मैंने उनसे चर्चा की कि कैसे पिछले एक दशक में भारत की विदेश नीति विकसित हुई है, जिसकी शुरुआत पड़ोस से हुई।"
उन्होंने अधिकारियों को समझाया कि क्षेत्रीय स्थिरता, आपसी सहयोग और आर्थिक एकीकरण को प्राथमिकता देकर भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को नई दिशा दी है। इस नीति के तहत बुनियादी ढांचे, संपर्क, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर विशेष ध्यान दिया गया।
विदेश मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि दुनिया इस समय अभूतपूर्व बदलावों के दौर से गुजर रही है। भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, नई तकनीकें वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं और कोविड-19 महामारी के बाद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव आया है।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में एक कूटनीतिज्ञ के लिए इन बदलावों से सही सबक लेना और उन्हें नीति में शामिल करना जरूरी है। डॉ. जयशंकर ने अधिकारियों से कहा कि भारत आज दुनिया में एक महत्वपूर्ण आवाज के रूप में उभर रहा है। जी-20 की अध्यक्षता, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर भारत की भूमिका बढ़ी है। ऐसे में विदेश सेवा के अधिकारियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे भारत के हितों को मजबूती से आगे बढ़ाएं।
बता दें कि सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान में आयोजित यह मिड-कैरियर ट्रेनिंग प्रोग्राम आईएफएस अधिकारियों को नई चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम में विदेश नीति, कूटनीतिक कौशल, आर्थिक कूटनीति और मीडिया प्रबंधन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाता है।
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